नई दिल्ली: केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए “विकसित गांव” के निर्माण का आह्वान किया है। नई दिल्ली में ग्रामीण विकास मंत्रालय की कार्यनिष्पादन समीक्षा समिति की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक ‘विकसित गांव’ वह होगा जहाँ हर परिवार के पास बुनियादी सुविधाओं वाला एक पक्का घर होगा, वह गुणवत्तापूर्ण सड़कों से जुड़ा होगा, हर ग्रामीण युवा के पास रोजगार के अवसर होंगे और हर महिला सशक्त और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होगी। उन्होंने इसे एक प्राप्त करने योग्य लक्ष्य बताया, जिसके लिए नई ऊर्जा, नवीन सोच और गहरी प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
पेम्मासानी ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण विकास मंत्रालय की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मंत्रालय केवल योजनाओं को लागू नहीं कर रहा है, बल्कि भारत की विकास गाथा का अगला अध्याय लिख रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व में ग्रामीण विकास में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की।

प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं की उपलब्धियां और सुझाव
श्री पेम्मासानी ने मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और उनके बेहतर कार्यान्वयन के लिए कई सुझाव दिए:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा): उन्होंने मनरेगा को ग्रामीण बेरोजगारी और कृषि के कमजोर मौसम में होने वाले संकटपूर्ण पलायन के विरुद्ध एक हथियार बताया। इस योजना में 90,000 से 1,00,000 करोड़ रुपये के वार्षिक निवेश के परिणामस्वरूप टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है। प्रतिवर्ष 250 करोड़ से अधिक मानव-दिवस सृजित हुए हैं, 36 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड जारी किए गए हैं और 15 करोड़ से अधिक श्रमिक इसके लाभार्थी हुए हैं। श्री पेम्मासानी ने वेतन भुगतान के बजाय सार्थक परिसंपत्ति निर्माण, विविध कार्यों को अपनाने, अन्य विकास योजनाओं के साथ अभिसरण, और कार्य चयन में सामुदायिक भागीदारी का सुझाव दिया।
- प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी): इस योजना के तहत अब तक कच्चे या जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए 3.22 करोड़ से ज़्यादा पक्के घर बनाए जा चुके हैं। परिवार वृद्धि और ग्रामीण जनसंख्या विस्तार के कारण बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 2029 तक 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण-अनुकूल और क्षेत्र-विशिष्ट निर्माण तकनीकों और लागत-प्रभावी आवास डिज़ाइनों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई): इस योजना के तहत अब तक 7.56 लाख किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। श्री पेम्मासानी ने राज्यस्तरीय सड़क रखरखाव निधि की स्थापना, समुदाय आधारित निगरानी प्रणालियों के कार्यान्वयन और स्थिरता के लिए अभिनव वित्तपोषण मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया।
- डीएवाई-एनआरएलएम (दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन): मंत्री ने कहा कि यह सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली साधन बन गया है, जिसमें 10.05 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 91 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया गया है और संचयी बैंक लिंकेज 11 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।
- लखपति दीदी पहल: केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 3 करोड़ महिलाओं के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ महिलाएं पहले ही सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाने में सक्षम हैं। श्री पेम्मासानी ने लक्षित ऋण, उन्नत कौशल और बाजार तैयार समर्थन के माध्यम से “लखपति दीदी” को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- डीडीयू-जीकेवाई (दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना) कौशल एवं नियोजन कार्यक्रम: इस कार्यक्रम ने 17 लाख से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया है और 11 लाख से अधिक को लाभकारी रोजगार दिलाया है।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, और भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Happy to attend and address senior officials and stakeholders from across States at the Performance Review Committee (PRC) Meeting for FY 2025–26 at Sushma Swaraj Bhawan.
— Dr. Chandra Sekhar Pemmasani (@PemmasaniOnX) July 14, 2025
Chaired the inaugural session with Hon’ble MoS Shri @kamleshpassi67 ji.
Under the leadership of Hon’ble PM… pic.twitter.com/GjeOy1zK2x
