बिहार की राजनीति में आज एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। भाजपा के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी ने आज सुबह 11 बजे पटना के लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सम्राट चौधरी बिहार के इतिहास में इस सर्वोच्च पद को संभालने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले नेता बन गए हैं। यह ऐतिहासिक परिवर्तन नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे और उनके राज्यसभा जाने के बाद आया है।
नीतीश युग का अंत और चौधरी का उदय
बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से चले आ रहे नीतीश कुमार के वर्चस्व का औपचारिक अंत 14 अप्रैल को हुआ, जब उन्होंने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा। नीतीश कुमार को हाल ही में राज्यसभा सांसद चुना गया है और उन्होंने 10 अप्रैल को उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ भी ली थी। उनके हटने के बाद भाजपा ने सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना। सम्राट चौधरी की ताजपोशी को बिहार में ओबीसी (OBC) राजनीति, विशेष रूप से कुशवाहा/कोइरी समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल माना जा रहा है।
#Live: बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करते हुए… https://t.co/Ijdnon3Zl3
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) April 15, 2026
शपथ ग्रहण समारोह की मुख्य बातें
लोक भवन में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एकजुटता साफ नजर आई। समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेता मौजूद रहे। गौरतलब है कि नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उन्होंने भी हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है। सम्राट चौधरी के साथ जदयू (JD-U) कोटे से दो उपमुख्यमंत्री, विजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी के भी शपथ लेने की खबरें हैं, जो नई सरकार में गठबंधन के संतुलन को दर्शाते हैं।
पीएम मोदी की मौजूदगी और राजनीतिक संकेत
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि पर संशय बना हुआ था, लेकिन सूत्रों के अनुसार शपथ ग्रहण के दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंधों और हाई-प्रोफाइल मेहमानों की सूची ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर 90 के दशक में राजद (RJD) से शुरू हुआ था, जिसके बाद वे जदयू में रहे और 2018 में भाजपा में शामिल हुए। उनके पिता शकुनी चौधरी और माता पार्वती देवी का भी बिहार की राजनीति में बड़ा कद रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में भाजपा के लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य पर अपनी स्वतंत्र पकड़ बनाने का एक बड़ा अवसर है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी बिहार के विकास और कानून-व्यवस्था को किस नई दिशा में ले जाते हैं।
