नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों द्वारा शुरू किया गया वेतन वृद्धि आंदोलन अब रिहायशी इलाकों और हाउसिंग सोसायटियों तक फैल गया है। मंगलवार को नोएडा के सेक्टर 121 स्थित एक प्रतिष्ठित सोसाइटी के बाहर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब घरों में काम करने वाली मेड, सफाई कर्मचारी और दैनिक वेतनभोगी मजदूरों ने मोर्चा खोल दिया। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अचानक सोसाइटी पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सोसाइटी के बाहर हुए इस विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें कामगारों को सड़क पर तोड़फोड़ करते और नारेबाजी करते देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस तरह से फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी की मांग उठ रही है, उसी तरह सोसायटियों में काम करने वाले घरेलू सहायकों और सफाईकर्मियों की मजदूरी भी बढ़ाई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि महंगाई के इस दौर में पुराने वेतन पर काम करना अब मुमकिन नहीं है।
आज दिनांक 14.04.2026 को नोएडा में चल रहे धरना/प्रदर्शन के दृष्टिगत कमिश्नरेट नोएडा में सुदृढ़ पुलिस व्यवस्थापन किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पर्याप्त पुलिस बल एवं वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न स्थलों पर तैनात हैं। क्लियो काउंटी,गढ़ी चौखंडी,सेक्टर-121,सेक्टर-70, का घटना स्थल… pic.twitter.com/2v5rXNos9Z
— POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR (@noidapolice) April 14, 2026
यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद देर रात ही न्यूनतम मजदूरी दरों में अंतरिम बढ़ोतरी का आदेश जारी किया था। सरकार के नए आदेश के मुताबिक, अलग-अलग श्रेणियों में वेतन में करीब 3000 रुपये तक का इजाफा किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी इस वृद्धि से संतुष्ट नहीं हैं और 20 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी की मांग पर अड़े हैं।
सेक्टर 121 की घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। औद्योगिक इलाकों की तरह यहां भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और कहासुनी देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। नोएडा में लगातार दूसरे दिन जारी इस उथल-पुथल ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि अब यह आंदोलन फैक्ट्रियों की चारदीवारी से निकलकर आम नागरिक सोसायटियों के दरवाजों तक पहुंच गया है।
