पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले सुखेंदु शेखर रे ने तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता छोड़ने के साथ-साथ राज्यसभा सांसद पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
बताया जा रहा है कि रे ने गुरुवार सुबह संसद पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी कोई संकेत नहीं दिया है और यह स्पष्ट नहीं है कि वे किसी अन्य दल में शामिल होंगे या नहीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी असंतोष का सामना कर रही है। पार्टी के कई नेताओं के इस्तीफों की चर्चाओं के बीच रे का फैसला राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुखेंदु शेखर रे लंबे समय से ममता बनर्जी के विश्वस्त नेताओं में शामिल रहे हैं। वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने के बाद से उन्होंने पार्टी और नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि वे उसी पार्टी के साथ बने रहेंगे, जिसके चुनाव चिह्न पर उन्होंने जीत हासिल की थी।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा पहले से चल रही थी कि विधानसभा स्तर पर शुरू हुआ असंतोष अब संसद तक पहुंच सकता है। विधायकों के बाद किसी सांसद का पार्टी से अलग होना इस बहस को और तेज कर सकता है।
गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDI की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर हो रहे बदलावों ने तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति और भविष्य को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
