Punjab G RAM G Scheme: विरोध के 6 महीने बाद भगवंत मान सरकार ने लागू की केंद्र की ग्रामीण रोजगार योजना

पंजाब सरकार ने केंद्र की ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी G RAM G योजना को 1 जुलाई 2026 से राज्य में लागू करने का फैसला किया है। यह निर्णय इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करीब छह महीने पहले राज्य सरकार ने इसी योजना का विधानसभा में विरोध किया था।

पंजाब में G RAM G योजना लागू
पंजाब में G RAM G योजना लागू

Punjab G RAM G Scheme: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (G RAM G) योजना को राज्य में लागू कर दिया है। करीब छह महीने पहले जिस योजना का राज्य विधानसभा में विरोध किया गया था, अब उसी को 1 जुलाई से लागू करने का नोटिफिकेशन ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने जारी कर दिया है। इस फैसले को फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों और राज्य की वित्तीय स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि योजना लागू नहीं करने पर पंजाब को केंद्र से मिलने वाले करीब 750 से 800 करोड़ रुपये के फंड का नुकसान होता। बताया गया है कि योजना का कुल वार्षिक बजट लगभग 1,250 से 1,300 करोड़ रुपये होगा, जिसमें राज्य सरकार को अपने हिस्से के करीब 500 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह फंड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए है और इसे स्वीकार नहीं करने का मतलब पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकार से वंचित करना होता। इसी कारण जनहित को ध्यान में रखते हुए योजना लागू करने का निर्णय लिया गया।

केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के स्थान पर G RAM G योजना लागू की है। इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है।

फंडिंग पैटर्न में भी बदलाव किया गया है। मनरेगा के तहत केंद्र सरकार मजदूरी का 100 प्रतिशत और सामग्री एवं प्रशासनिक खर्च का 75 प्रतिशत वहन करती थी। वहीं G RAM G योजना में केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय भागीदारी का अनुपात 60:40 रखा गया है। इसी बदलाव का पंजाब सरकार ने पहले विरोध किया था।

30 दिसंबर 2025 को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में इस नए कानून को वापस लेने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उस समय मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे गरीब, किसान, दलित, महिला और मजदूर विरोधी बताया था।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य की वित्तीय स्थिति दबाव में है। वर्ष 2026-27 के बजट के अनुसार पंजाब पर कुल कर्ज 4.07 लाख करोड़ रुपये है, जिसके अगले वित्तीय वर्ष में 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं राज्य का कुल सब्सिडी बिल 26,612 करोड़ रुपये बताया गया है।

इसी के साथ 1 जुलाई से राज्य सरकार अपनी ‘मावां धियां सत्कार योजना’ भी शुरू कर रही है। इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इसके लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पूछा कि दिसंबर से जून के बीच ऐसा क्या बदल गया कि सरकार ने योजना लागू करने का फैसला कर लिया। वहीं शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रवक्ता परमबंस सिंह बंटी रोमाणा ने भी सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए।

वहीं, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार गरीब मजदूरों को उनके रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सरकार सैद्धांतिक रूप से मनरेगा में किए गए बदलावों का विरोध करती है, लेकिन मजदूरों के हितों को देखते हुए योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है। AAP नेताओं का यह भी कहना है कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों ने भी आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद इस योजना को लागू किया है।

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