उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए अदालत अपना निर्णय सुना सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से संबंधित इस मुकदमे में 13 अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। अदालत में पेशी के लिए राहुल गांधी दिल्ली से सुल्तानपुर रवाना हो गए हैं।
राहुल के आगमन को लेकर स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने शहर में आठ स्थानों पर उनके स्वागत की व्यवस्था की है। इस मामले में राहुल गांधी पिछली बार 2024 में अदालत पहुंचे थे। 20 फरवरी 2024 को पेशी के दौरान उन्हें जमानत मिली थी।
2018 के भाषण से शुरू हुआ था विवाद
मामले की जड़ें वर्ष 2018 में बेंगलुरु में आयोजित एक जनसभा में दिए गए राहुल गांधी के बयान से जुड़ी हैं। उस समय सुल्तानपुर में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रहे विजय मिश्रा ने इस टिप्पणी को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 4 अगस्त 2018 को एमपी-एमएलए कोर्ट में शिकायत दर्ज हुई। बाद में 16 दिसंबर 2018 को अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया।
दोनों पक्षों ने अदालत में रखी अपनी दलीलें
मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने राहुल गांधी को फैसला सुनाए जाने के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने लिखित दलील में बयान दिए जाने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता संतोष पांडेय ने इसका जवाब देते हुए अपनी दलीलें रखीं और न्यायिक फैसलों का उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने सुनवाई के दौरान खुद को निर्दोष बताया था। बचाव पक्ष की दलील है कि उनका भाषण सद्भावना के साथ दिया गया था और इसके आधार पर मानहानि का मुकदमा नहीं बनता। राहुल गांधी ने यह आरोप भी लगाया था कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत इस मामले में फंसाया जा रहा है।
