लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित एक विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) अदालत ने मानहानि से जुड़े एक चर्चित मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राहत देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया है। यह पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से संबंधित था। अदालत का अंतिम निर्णय आने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर के बाहर एकत्र हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते हुए जश्न मनाना शुरू कर दिया और अपनी खुशी का खुलकर इजहार किया।
आरोप साबित करने में विफल रहा शिकायतकर्ता पक्ष
फैसले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी के वकील ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता और दूसरा पक्ष अदालत के समक्ष अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। साक्ष्यों के अभाव और तथ्यों की समीक्षा के आधार पर विशेष अदालत ने कांग्रेस नेता को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।
साल 2018 में दर्ज हुआ था मानहानि का यह मामला
यह पूरा विवाद वर्ष 2018 का है, जब कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस बयान से आहत होकर सुल्तानपुर जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र अंतर्गत हनुमानगंज के रहने वाले तत्कालीन भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय मिश्रा ने सुल्तानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का एक परिवाद (मुकदमा) दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने 16 दिसंबर 2023 को राहुल गांधी को अदालत में तलब किया था, जिसके बाद वे कोर्ट में पेश हुए थे।
फरवरी 2024 में मिली थी जमानत और हाईकोर्ट तक पहुंची थी कानूनी लड़ाई
मामले की न्यायिक कार्यवाही के दौरान फरवरी 2024 में सुल्तानपुर की विशेष अदालत ने राहुल गांधी को जमानत प्रदान की थी। सुनवाई के समय भी राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया था। इसके बाद साक्ष्य जुटाने और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल (आवाज के नमूने) की तुलना कराने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद सेशन कोर्ट और फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली शिकायतकर्ता की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अंततः साक्ष्य संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने और अंतिम बहस के बाद अदालत ने राहुल गांधी को इस मानहानि मामले में बरी करने का निर्णय सुनाया।
