इजराइल में हुए हालिया संसदीय चुनावों के बाद वहां की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है, जिसमें लंबे समय से प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू काफी पिछड़ते हुए नजर आ रहे हैं। इजराइल रक्षा बलों (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट अगली सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे निकल गए हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच विभिन्न राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास ने इस पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे गाजा और फिलिस्तीन में मारे गए बेकसूर लोगों को याद करने का दिन बताया है।
चुनाव के आंकड़े और राजनीतिक समीकरण
120 सदस्यीय इजराइली संसद (नेसेट) में हुए चुनावों में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत (61 सीटें) हासिल नहीं हुआ है। चुनाव परिणामों के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि गादी आइजेनकोट के गठबंधन ने 48 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। इसके अलावा, इस चुनाव में अरब दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 19 सीटें हासिल की हैं और वे सरकार गठन में किंगमेकर की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गतिरोध के बीच अरब दलों ने गादी आइजेनकोट को समर्थन देने की घोषणा कर दी है, जिससे उनकी स्थिति मजबूत हो गई है।
What a day to cheer! And also a day to remember all those who died in Gaza, Palestine at the hands of the mass-murderer. Hoping this moves forward and Benjamin Netanyahu finally suffers a fate worse than the one he inflicted on innocent people. ✊🏻
— Saurav Das (@SauravDassss) November 6, 2026
नेतन्याहू की मुश्किलों के कारण
अनुमानों और आंकड़ों के आधार पर गादी आइजेनकोट को लगभग 67 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में केवल 46 सांसदों का समर्थन ही बनता दिख रहा है। नेतन्याहू की संभावनाओं को उस समय सबसे बड़ा झटका लगा जब उनके लंबे समय के सहयोगी दल ‘यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म’ (UTJ) ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने का तटस्थ फैसला ले लिया।
सरकार गठन की प्रक्रिया और आगे के कदम
केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा औपचारिक रूप से चुनाव परिणाम सौंपे जाने के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने नेसेट में सीटें जीतने वाले राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इजराइली परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे मजबूत संभावना होती है।
इस पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाता है, जिसमें दलों के नेताओं की राय और समर्थन को आधार बनाया जाता है। सरकार बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाले नेता को अपना गठबंधन साबित करने और सरकार बनाने के लिए 28 दिनों का समय मिलता है। यदि राष्ट्रपति को यह उचित लगता है कि सरकार बनने की पूरी संभावना है, तो वे अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए इस समयावधि को 14 दिन और बढ़ा सकते हैं।
