नई दिल्ली: ईरान के साथ जारी युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर पैदा हुए एलपीजी (LPG) संकट के बीच भारत सरकार ने एक ठोस रणनीति तैयार कर ली है। घरेलू बाजार में ईंधन की कमी को रोकने के लिए सरकार ने जनता से अपील की है कि वे एलपीजी की जगह पीएनजी (PNG) कनेक्शन को प्राथमिकता दें। इस बीच, केंद्र सरकार ने सबसे बड़ी राहत प्रवासी मजदूरों को दी है, जिनके लिए छोटे सिलेंडरों की आपूर्ति को अब दोगुना करने का फैसला लिया गया है।
सरकार ने हर राज्य में प्रवासी मजदूरों को मिलने वाले 5 किलो के ‘फ्री ट्रेड एलपीजी’ (FTL) सिलेंडरों की दैनिक संख्या को दोगुना कर दिया है। ये अतिरिक्त सिलेंडर राज्य सरकारों के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के माध्यम से सीधे मजदूरों तक पहुँचाए जाएंगे। इस मुहिम में तेल विपणन कंपनियां (OMCs) सक्रिय भूमिका निभाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस फैसले से 5 किलो वाले एफटीएल सिलेंडरों की रोजाना बिक्री एक लाख यूनिट के पार पहुँच जाए, ताकि मजदूरों को खाना पकाने के ईंधन के लिए भटकना न पड़े।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 5 किलो के इन छोटे सिलेंडरों (FTL) को बाजार कीमत पर खरीदा जा सकता है और इनके लिए पते के प्रमाण (Address Proof) की अनिवार्यता नहीं होती, जिससे प्रवासी मजदूरों के लिए इन्हें लेना आसान हो जाता है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैस वितरकों के पास स्टॉक की कोई कमी नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, एक ही दिन में 51 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडरों की रिकॉर्ड आपूर्ति की गई है और कुल मांग का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा किया जा रहा है। 23 मार्च से अब तक लगभग 6.6 लाख ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
संकट के इस समय में कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। मार्च से अब तक देश भर में 50,000 से अधिक अवैध सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं। अनियमितता बरतने वाले एलपीजी वितरकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 1,400 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और अब तक 36 डीलरशिप को निलंबित किया जा चुका है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ईंधन की आपूर्ति में बाधा डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
