आईआईटी बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले की जांच जारी है। इस घटना को लेकर साहिल के परिवार और उसके करीबी दोस्त की ओर से अलग-अलग बातें सामने आई हैं। परिवार ने संस्थागत उत्पीड़न और जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया है, जबकि साहिल के दोस्त यतीश कुमार ने परिसर में जातिवाद की बात से इनकार किया है। यतीश के मुताबिक, साहिल पर पढ़ाई और परीक्षा का काफी दबाव था और उसकी मानसिक स्थिति को भी इस मामले में ध्यान में रखा जाना चाहिए।
यतीश ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि उसने आईआईटी बॉम्बे परिसर में कभी जातिगत भेदभाव जैसा अनुभव नहीं किया। उसके मुताबिक, परीक्षा से कुछ दिन पहले तक साहिल सामान्य, खुशमिजाज और हंसमुख था। यतीश ने बताया कि परीक्षा के दिन साहिल को नकल करते हुए पकड़ा गया था और इसके बाद प्रोफेसर उसे बाहर लेकर गए थे।
यतीश ने कहा कि परीक्षा में नकल करना गलत है, लेकिन किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई या सजा तय करते समय उसकी मानसिक स्थिति को समझना और उससे बातचीत करना भी जरूरी है। अपने दोस्त को याद करते हुए उसने कहा कि साहिल को खोना उसके साथ-साथ पूरे कॉलेज के लिए गहरा आघात है। यतीश ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उसे परिसर में जातिवाद का कोई मुद्दा नजर नहीं आया और उसने खुद कभी ऐसा अनुभव नहीं किया।
दूसरी ओर, साहिल के परिवार ने संस्थान में जाति आधारित भेदभाव और कथित संस्थागत उत्पीड़न का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते साहिल ने आत्महत्या की। माता-पिता ने भेदभाव के आरोपों को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज कराया है।
साहिल की दादी श्यामलता तायडे ने भी उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। दादी के मुताबिक, साहिल बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार था और हर कक्षा में प्रथम आता था। वह पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानता था और उनके जैसा बनने की इच्छा रखता था।
श्यामलता तायडे ने कहा कि साहिल ने आईआईटी में दाखिला हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की थी और परिवार के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह ऐसा कदम उठा सकता था। उन्होंने कहा कि साहिल बेहद मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र था और दूसरे बच्चे भी उसे देखकर पढ़ाई करते थे। मामले में अब जांच के साथ परिवार और संस्थान से जुड़े लोगों के अलग-अलग दावों पर भी सवाल बने हुए हैं।
