भारत-न्यूजीलैंड FTA पर मुहर: कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग उत्पादों पर अब ‘जीरो ड्यूटी’, जानें क्या होगा सस्ता

India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 16 साल का इंतजार खत्म! 27 अप्रैल को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए। अब भारतीय कपड़ा, इंजीनियरिंग और आईटी सेवाओं को न्यूजीलैंड में बंपर मौका मिलेगा, वहीं भारत को $20 अरब का निवेश प्राप्त होगा। डेयरी किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत ने कुछ क्षेत्रों को बाहर रखा है।

भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता
भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता

India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार 27 अप्रैल को बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए गए। यह समझौता दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के साथ-साथ निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह एफटीए तय तारीख के अनुसार लागू होगा और इसके तहत दोनों देश आपसी व्यापार पर लगने वाले सीमा शुल्क को खत्म या काफी हद तक कम करने पर सहमत हुए हैं, जिससे व्यापारिक बाधाएं भी घटेंगी।

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए की बातचीत पहली बार वर्ष 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में नौ दौर की वार्ता के बाद यह ठप पड़ गई थी। इसके बाद मार्च 2025 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और 22 दिसंबर 2025 को वार्ता पूरी होने की घोषणा की गई। अब 27 अप्रैल 2026 को इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर हुए हैं। इस व्यापक समझौते में 20 अध्याय शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, सीमा शुल्क, व्यापार सुगमता, स्वच्छता और मानक (SPS), तकनीकी बाधाएं (TBT), विवाद निपटान और कानूनी प्रावधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

इस समझौते का स्वागत अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने भी किया है। यह समझौता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हुआ। एईपीसी के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने इसे भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी, खासकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में। इससे निर्यात में वृद्धि, रोजगार सृजन और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

समझौते के तहत भारत के कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा और इंजीनियरिंग जैसे कई उत्पाद न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क पर निर्यात किए जा सकेंगे। इसके अलावा न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने का वादा किया है। सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत को आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा, वित्त, पर्यटन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर मिलेंगे। साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा का एक नया मार्ग खुलेगा, जिसमें एक समय में 5,000 वीजा का कोटा होगा और अधिकतम तीन वर्षों तक रहने की अनुमति दी जाएगी।

दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को भी भारतीय बाजार में बड़ा लाभ मिलेगा। समझौते के लागू होते ही न्यूजीलैंड के 54.11 प्रतिशत निर्यात पर भारत में शून्य शुल्क मिल जाएगा। इसमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और लकड़ी जैसे उत्पाद शामिल हैं। सेब, कीवी, मनुका शहद और डेयरी से जुड़े कुछ उत्पादों पर रियायती शुल्क लागू होगा, जबकि समुद्री उत्पादों और धातु से जुड़े सामानों पर शुल्क आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा।

हालांकि, भारत ने अपने किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों की रक्षा के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। इसमें डेयरी उत्पाद, अधिकांश पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, तांबा, एल्युमिनियम, हथियार, रत्न और आभूषण जैसे सेक्टर शामिल हैं, जिन पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है।

दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024 में कुल वस्तु और सेवा व्यापार करीब 2.4 अरब डॉलर तक पहुंचा। भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में विमान ईंधन, दवाएं, वाहन, पेट्रोलियम उत्पाद और रेडीमेड कपड़े शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से लकड़ी, ऊन, डेयरी उत्पाद, कोयला और धातु से जुड़े सामान आयात किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत करने में मदद करेगा, वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में बेहतर और सुरक्षित बाजार पहुंच उपलब्ध कराएगा।

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