ट्विशा शर्मा मौत मामला: पुलिस कमिश्नर ने की पुष्टि—फांसी लगाने से ही हुई मौत; पूर्व जज के फरार बेटे समर्थ की तलाश में दबिश

Twisha Sharma Death Case: भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने नोएडा की ट्विशा शर्मा की मौत को पूरी तरह आत्महत्या का मामला बताया है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगना सामने आई है। मृतका के परिजनों ने पूर्व जज के बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर दहेज और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं, जो घटना के बाद से ही फरार है।

ट्विशा शर्मा भोपाल सुसाइड केस
ट्विशा शर्मा भोपाल सुसाइड केस

Twisha Sharma Death Case: भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की है कि नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत का मामला पूरी तरह से आत्महत्या का है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह फांसी लगना ही सामने आया है। कमिश्नर के मुताबिक, पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों और कारणों के चलते ट्विशा को यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने साफ किया कि जांच निष्पक्षता और तेजी से केवल इसी पहलू पर आगे बढ़ रही है।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि देखें तो 12 मई को ट्विशा शर्मा भोपाल स्थित अपने ससुराल की छत पर फंदे से लटकी पाई गई थीं, जिसके बाद इस घटना ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। मृतका के मायके वालों और परिजनों ने ससुराल पक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्विशा को लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और उसे दहेज के लिए भी लगातार परेशान किया जाता था।

ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह नाम के युवक से हुई थी, जिससे उसकी मुलाकात साल 2024 में एक डेटिंग ऐप के माध्यम से हुई थी। समर्थ सिंह सेवानिवृत्त (रिटायर) जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। घटना के बाद से ही आरोपी पति समर्थ लगातार फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे जब ट्विशा के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष अपने मजबूत कानूनी रसूख का फायदा उठाकर न्यायिक राहत पाने की कोशिश कर रहा है और पुलिस दबाव में काम कर रही है। इन आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आम तौर पर पुलिस मुख्यालय के नियमों के तहत ऐसी घटनाओं में एफआईआर दर्ज करने के लिए एक महीने तक का समय मिलता है, लेकिन पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महज दो दिन के भीतर ही प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।

इसके अलावा, फांसी में इस्तेमाल की गई सामग्री को पोस्टमार्टम के बाद एम्स (AIIMS) भेजे जाने की प्रक्रिया पर उठे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी अलग से जांच कराई जा रही है। हालांकि, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट पोस्टमार्टम के निष्कर्षों से पूरी तरह मेल खाती है। पुलिस कमिश्नर ने यह भी कहा कि अगर मृतका का परिवार संतुष्टि के लिए दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने की मांग उठाता है, तो पुलिस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। पति की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर उन्होंने तर्क दिया कि कई बार बड़े अपराधी जल्द पकड़ में आ जाते हैं जबकि इस तरह के मामलों में आरोपियों को ढूंढने में थोड़ा वक्त लग जाता है, लेकिन पुलिस को भरोसा है कि समर्थ जल्द ही उनकी हिरासत में होगा।

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