Twisha Sharma Case: मॉडल और एक्टर ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पिछले कई दिनों से फरार चल रहे उनके पति समर्थ सिंह ने शुक्रवार को जबलपुर जिला अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। समर्थ सिंह के वकील जयदीप कौरव के मुताबिक, उन्होंने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने के बाद ही कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का फैसला किया। अदालत परिसर में दाखिल होते समय समर्थ सिंह ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क और सिर पर टोपी लगा रखी थी, और वहां मौजूद पत्रकारों द्वारा ट्विशा की मौत व उन पर लगे आरोपों को लेकर पूछे गए तमाम सवालों पर उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी।
दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरोपी समर्थ सिंह को कोर्ट या पुलिस के सामने सरेंडर करने का विकल्प दिया था, जिसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। उनके एक अन्य वकील सौरभ सुंदर ने बताया कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष इस संबंध में अर्जी दाखिल कर रहे हैं।
आरोपी पर था 30 हजार रुपये का इनाम
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही समर्थ सिंह लगातार पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहे थे। उनकी तलाश में जुटी भोपाल पुलिस ने आरोपी समर्थ सिंह की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने वाले के लिए 30 हजार रुपये के नकद इनाम की घोषणा भी की थी। इसके साथ ही, पुलिस ने उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उनका पासपोर्ट रद्द करवाने के लिए भी अदालत में अर्जी दाखिल की थी।
पीड़ित परिवार की आपत्तियां और रसूख का आरोप
समर्थ सिंह द्वारा जबलपुर जिला अदालत में सरेंडर किए जाने के स्थान और समय पर ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समर्थ ने जानबूझकर सरेंडर के लिए उस जगह को चुना है जहां उनका और उनके परिवार का सीधा रसूख है। गौरतलब है कि समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह खुद एक पूर्व जज रही हैं, जिसके कारण न्यायपालिका में उनके गहरे संबंध माने जाते हैं। इसके अलावा, आरोपी समर्थ सिंह खुद भी मध्य प्रदेश सरकार के साथ कानूनी सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें कानून की हर बारीकी और कानूनी राहत पाने के रास्तों का अच्छी तरह पता है। मृतका के चाचा का सीधा आरोप है कि यह जिला अदालत उनके अपने घर जैसी है और वह यहां केवल इसलिए आए हैं ताकि सिस्टम में मौजूद अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल करके इस पूरे मामले को कमजोर करवा सकें।
‘जनता के दबाव में टूटा अहंकार’ — भाई मेजर हर्षित शर्मा
दूसरी तरफ, ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने इस सरेंडर को न्याय की दिशा में पहली जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि समर्थ को अब यह अच्छी तरह एहसास हो गया है कि पूरा देश ट्विशा को न्याय दिलाने के लिए साथ खड़ा है और अब उसके पास छिपने का कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समर्थ को कुछ भी छिपाना नहीं था, तो उसने 10 दिनों तक छिपने के बजाय पहले ही कानून का सामना क्यों नहीं किया? यह केवल जनता के भारी समर्थन और कानून के बढ़ते दबाव का ही नतीजा है जिसने उसे बाहर आने पर मजबूर कर दिया है।
आने वाले 72 घंटे बेहद अहम, सोमवार को होगी बड़ी सुनवाई
ट्विशा शर्मा मामले की जांच के लिहाज से आने वाले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों का एक विशेष पैनल भोपाल पहुंच रहा है, जो दोबारा ट्विशा के शव का परीक्षण (पोस्टमॉर्टम) करेगा। इसके साथ ही, इस मामले की दूसरी आरोपी और मृतका की सास गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर सोमवार, 25 मई को दोपहर 2:30 बजे हाई कोर्ट की एकल पीठ के समक्ष अहम सुनवाई होनी तय हुई है।
क्या है यह पूरा विवाद?
यह दुखद और संदिग्ध मामला बीती 12 मई का है, जब 33 वर्षीय मॉडल-एक्टर ट्विशा शर्मा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। ट्विशा के मायके वालों का आरोप है कि उनके ससुराल वालों ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि वह मौत के मुंह में चली गई। इसके विपरीत, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी। हालांकि, शुरुआती पोस्टमॉर्टम एम्स भोपाल में ही किया गया था, लेकिन पीड़ित परिवार ने उस प्रक्रिया में कुछ कमियों और गड़बड़ियों का अंदेशा जताते हुए दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की थी। भोपाल की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुदिता गुप्ता द्वारा इस अर्जी को खारिज किए जाने के बाद परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिल्ली एम्स की टीम को भोपाल बुलाकर दोबारा शव परीक्षण कराने का विशेष निर्देश दिया है।
