Pune Hooch Tragedy: पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब का तांडव, 15 लोगों की दर्दनाक मौत; मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े गिरफ्तार

Pune Liquor Tragedy: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

पुणे जहरीली शराब कांड Image: Magnific (formerly Freepik)
पुणे जहरीली शराब कांड Image: Magnific (formerly Freepik)

Pune Hooch Tragedy: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ संभाग से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ कथित तौर पर जहरीली शराब पीने के कारण कम से कम पंद्रह लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य लोगों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद से पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों के अनुसार, पिंपरी-चिंचवाड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी इलाके में सबसे ज्यादा आठ लोगों ने दम तोड़ा है, जबकि पुणे के काले पड़ल इलाके में तीन और हडपसर इलाके में दो लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन द्वारा जांच और मेडिकल रेस्क्यू की कार्रवाई तेज कर दी गई है।

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह जानलेवा और स्पिरिट युक्त जहरीली शराब योगेश वानखेड़े नाम के एक व्यक्ति ने तैयार की थी, जो लंबे समय से अवैध शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ है। इस मिलावटी शराब को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के अलग-अलग ग्रामीण और शहरी इलाकों में बेचा गया था। दापोडी, फुगेवाड़ी, हडपसर और काले पड़ल इलाके में जिन लोगों ने भी इस शराब का सेवन किया, कुछ ही समय बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी। चश्मदीदों और परिजनों के मुताबिक पीड़ितों के मुंह से झाग निकलने लगा और वे बेसुध होने लगे। स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि अधिकांश लोगों को अस्पताल ले जाने तक का समय नहीं मिला और उन्होंने इलाज शुरू होने से पहले ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को गिरफ्तार कर लिया है और बताया जा रहा है कि वह एक हिस्ट्रीशीटर अवैध शराब विक्रेता है जिसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

फुगेवाड़ी और आसपास के इलाकों में अवैध हाथभट्टी और देसी शराब के अड्डे धड़ल्ले से चलने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उनका सीधे तौर पर कहना है कि ये सभी मौतें जहरीली शराब पीने के कारण ही हुई हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर दापोडी पुलिस का एक अलग ही राग देखने को मिल रहा है। पुलिस ने शुरुआती जांच के हवाले से इसे महज एक अफवाह बताया है और दावा किया है कि ये सभी मौतें अलग-अलग और स्वतंत्र कारणों से हुई हैं, न कि जहरीली शराब से।

पुलिस के दावों के अनुसार, सत्तावन वर्षीय पांडुरंग फुगे की मौत पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से हुई है। वहीं इकतीस वर्षीय विजय राठौड़ और ज्योतिष वर्ष के उनके सगे भाई राजेंद्र राठौड़ की मौत के पीछे पुलिस ने दिल का दौरा पड़ने की आशंका जताई है। इसके अलावा इक्यावन वर्षीय राजेंद्र राजपूत की मौत के बारे में पुलिस का दावा है कि उनकी जान बाथरूम में अचानक चक्कर खाकर गिरने की वजह से हुई चोट के कारण गई है, जबकि बावन वर्षीय अकबर पठान के मामले में कहा गया है कि वे पिछले पंद्रह वर्षों से अत्यधिक शराब पीने के आदी थे। पुलिस के इन दावों के बावजूद स्थानीय लोग और पीड़ितों के परिवार प्रशासन के रवैये से बेहद नाराज हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध अड्डों को हमेशा के लिए बंद करने की मांग कर रहे हैं।

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