लखनऊ: राजधानी लखनऊ में एक विशेष एससी-एसटी अदालत ने दो भाइयों के खिलाफ 29 फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वाले अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले को लेकर हर जगह एक ही बात की चर्चा है कि अंततः सत्य की जीत होती है। अदालत ने उम्रकैद की सजा के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लगाया है।
अधिवक्ता परमानंद गुप्ता ने संपत्ति विवाद में अरविंद यादव और उनके भाई अवधेश यादव को फंसाने के लिए यह जघन्य अपराध किया था। उसने दुष्कर्म, एससी-एसटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत फर्जी मामले दर्ज कराए, जिसमें उसने अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली एक दलित महिला पूजा का इस्तेमाल किया।
मामले की जांच कर रहे तत्कालीन एसीपी राधा रमण सिंह ने पाया कि रेप का दावा किया गया स्थान एक खाली प्लॉट था, और कॉल रिकॉर्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से भी घटना की पुष्टि नहीं हो पाई। गहन जांच में खुलासा हुआ कि परमानंद ने कुल 29 फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे, जिनमें से 18 उसने खुद और 11 पूजा के जरिए दर्ज करवाए थे। सभी मामले झूठे पाए गए।
अदालत का यह फैसला न केवल उन निर्दोष लोगों को न्याय दिलाता है जिन्हें फंसाया गया था, बल्कि यह कानून का दुरुपयोग करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी है। यह मामला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मिसाल कायम करता है।
