Nashik TCS Case: 25 दिनों बाद गिरफ्त में आई मुख्य आरोपी निदा खान, पहली तस्वीर आई सामने

Nida Khan Arrested in Nashik TCS Conversion Case: नासिक के चर्चित टीसीएस (TCS) मामले में पुलिस को आखिरकार एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पिछले 25 दिनों से फरार चल रही महिला आरोपी निदा खान को पुलिस ने छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

Nashik TCS Case: नासिक के चर्चित टीसीएस केस में फरार चल रही महिला आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब 25 दिनों से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर चल रही निदा खान को छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव इलाके से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसकी पहली तस्वीर भी सामने आई है, जिसके बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार निदा खान पिछले कई दिनों से कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी। हैरानी की बात यह रही कि उसके साथ उसके चार रिश्तेदार भी उसी फ्लैट में मौजूद थे। पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि वह बार-बार अपना ठिकाना बदल रही है और करीबी लोगों की मदद से गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रही है।

आखिरकार नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजी नगर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि रात करीब 11:30 बजे पुलिस टीम ने उसे डिटेन किया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसका मेडिकल और हेल्थ चेकअप कराया गया। इसके बाद ट्रांजिट वारंट की प्रक्रिया के लिए उसे संभाजी नगर कोर्ट में पेश किया गया। अब उसे नासिक ले जाया जाएगा, जहां आज अदालत में पेश किया जाना है।

पुलिस के मुताबिक मामला सामने आने के बाद से ही निदा खान एजेंसियों के रडार पर थी। 25 मार्च के बाद से वह लगातार फरार थी और पुलिस की कई टीमें अलग-अलग शहरों में उसकी तलाश कर रही थीं। जांच अधिकारियों को संदेह था कि आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रही है और विश्वस्त लोगों की मदद से पुलिस की कार्रवाई से बच रही है।

इस दौरान निदा खान ने अग्रिम जमानत लेने की भी कोशिश की थी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। 2 मई 2026 को नासिक रोड कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस ने तलाश और तेज कर दी थी।

नासिक रोड कोर्ट में हुई सुनवाई को इस केस का अहम मोड़ माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अजय मिसर उपस्थित थे, जबकि आरोपी की ओर से वकील राहुल कासलीवाल ने पक्ष रखा। 29 अप्रैल को मामले की इन-कैमरा सुनवाई हुई थी, जिसमें एसआईटी की ओर से एसीपी संदीप मिटके ने जांच अधिकारी के रूप में अदालत के सामने रिपोर्ट पेश की थी और अग्रिम जमानत का विरोध किया था।

सरकारी पक्ष ने अदालत में दावा किया था कि आरोपी पर पीड़िता को धार्मिक तौर-तरीकों के लिए प्रभावित करने, कुछ धार्मिक एप डाउनलोड कराने और कई लिंक भेजने जैसे आरोप हैं। जांच एजेंसियों ने अदालत को यह भी बताया था कि मामले में कुछ डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल चैट और संपर्क विवरण सामने आए हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है।

मामले में कथित विदेशी कनेक्शन की भी जांच चल रही है। अदालत में मालेगांव और मलेशिया लिंक का जिक्र किया गया था। दावा किया गया कि नौकरी और प्रमोशन के नाम पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आशंका है। हालांकि अभी तक किसी विदेशी नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की गहन जांच जारी है।

सरकारी पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि पीड़िता के बयान, मोबाइल मैसेज, डिजिटल चैट और परिवार के सदस्यों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में दर्ज किए गए हैं। पीड़िता का नाम बदले जाने और कुछ दस्तावेज आरोपी पक्ष के पास होने जैसी बातों की भी जांच की जा रही है।

निदा खान की गिरफ्तारी के बाद नासिक से लेकर छत्रपति संभाजी नगर तक हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब आरोपी से पूछताछ के बाद कई नए खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि फरारी के दौरान उसे किसने मदद पहुंचाई, वह किन लोगों के संपर्क में थी और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।

पुलिस की नजर अब उन चार रिश्तेदारों पर भी है, जो उसके साथ फ्लैट में मौजूद थे। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या उन्हें आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर उसे शरण दी थी। अब सबसे ज्यादा नजर आज होने वाली अदालत की पेशी पर है, जहां पुलिस आरोपी की कस्टडी मांग सकती है ताकि फरारी, डिजिटल संपर्कों और कथित नेटवर्क को लेकर गहराई से पूछताछ की जा सके।

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