Delhi Bus Gangrape Case: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चलती बस के अंदर महिला से गैंगरेप के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि जिस प्राइवेट स्लीपर बस में यह वारदात हुई, उसका कनेक्शन बिहार से है। शुरुआती जांच के मुताबिक बस लंबे समय से कई नियमों का उल्लंघन करते हुए चल रही थी और उस पर भारी संख्या में चालान भी बकाया थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा बिहार तक बढ़ा दिया है और एक टीम जानकारी जुटाने के लिए गोपालगंज भेजी गई है।
जानकारी के अनुसार, बिहार नंबर प्लेट वाली यह बस गोपालगंज में रजिस्टर्ड थी। दिल्ली पुलिस ने बस के इतिहास, उसके परमिट और नियमों के पालन से जुड़े रिकॉर्ड हासिल करने के लिए गोपालगंज परिवहन विभाग से संपर्क किया है। सूत्रों के मुताबिक, परिवहन अधिकारियों ने पहले भी इस बस को नियमों के उल्लंघन के कारण जब्त किया था। इसके बावजूद यह लगातार सड़कों पर चलती रही।
जांच में सामने आया है कि बस पर बिना वैध परमिट संचालन, ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार जैसे कई मामलों में चालान काटे गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस बस पर करीब 4 लाख रुपये तक का जुर्माना बकाया था और क्या परिवहन विभाग ने इसे ब्लैकलिस्ट भी किया था। सूत्रों का कहना है कि बस के खिलाफ करीब 80 चालान लंबित थे।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह बस गोपालगंज की एक निजी संस्था की थी और बिहार से दिल्ली के बीच ‘टूरिस्ट परमिट’ के तहत संचालित की जा रही थी। पुलिस अब बस के मालिक, ड्राइवर और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी शिकायतों और नियम उल्लंघनों के बावजूद बस कैसे चलती रही।
दिल्ली पुलिस अब बस के खिलाफ दर्ज सभी चालानों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही ड्राइवर के लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी कब से इस बस को चला रहे थे और क्या बस मालिक को किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों की जानकारी थी।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में निजी बसों द्वारा ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस साल 1 जनवरी से 24 मार्च के बीच ट्रैफिक पुलिस ने निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ 6,566 चालान जारी किए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 3,029 थी। यानी चालानों में लगभग 116 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इन निजी बसों पर बिना वैध परमिट संचालन, तेज रफ्तार, यात्रियों और सामान की ओवरलोडिंग तथा फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना बसें चलाने जैसे आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। अब इस मामले के बाद एक बार फिर राजधानी में निजी बसों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पूरा मामला 11 और 12 मई की रात का बताया जा रहा है। पीड़िता के अनुसार, वह रानीबाग इलाके से एक निजी बस में सवार हुई थी, जिसके अंदर पर्दे लगे हुए थे। आरोप है कि बाहरी दिल्ली के नांगलोई इलाके में चलती बस के भीतर उसके साथ गैंगरेप किया गया। महिला की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और बस के संचालन से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।
