नई दिल्ली: आयकर विभाग (Income Tax Department) के अनुसार, आज शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की सुबह तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस संबंध में कोई प्रेस रिलीज जारी नहीं की है, जिसका अर्थ है कि ज्यादातर व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आज रात ही रिटर्न जमा करने का अंतिम अवसर है। करदाताओं की सहायता के लिए आयकर विभाग का हेल्पडेस्क आज रात 11:59 बजे तक निरंतर (24×7) कार्य कर रहा है।
किसे आज ही फाइल करना है रिटर्न?
यदि आप वेतनभोगी (सैलरीड) पेशेवर या पेंशनभोगी हैं और ITR-1 या ITR-2 फॉर्म के तहत आते हैं, तो आज आपके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि है। अधिकांश गैर-व्यावसायिक करदाता इसी श्रेणी में आते हैं। वहीं, जिन व्यवसायों और ट्रस्टों का ऑडिट होना अनिवार्य नहीं है, उनके पास 31 अगस्त 2026 तक का समय उपलब्ध है। यदि आज की डेडलाइन छूट जाती है, तो करदाता 31 दिसंबर 2026 तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ दाखिल कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए विलंब शुल्क (लेट फीस) और ब्याज का भुगतान करना होगा।
डिजिटल माध्यमों से टैक्स भुगतान की प्रक्रिया
रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को अपना टैक्स कैलकुलेट करके पोर्टल के ‘e-Pay Tax’ सेक्शन में चालान रेफरेंस नंबर (CRN) जेनरेट करना होगा। टैक्स का भुगतान लॉगिन करने से पहले ‘Quick Links’ के जरिए या लॉगिन के बाद भी किया जा सकता है। भुगतान के लिए नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड तथा RTGS/NEFT का विकल्प उपलब्ध है। यदि बैंक जाकर NEFT या RTGS से भुगतान करना है, तो पहले चालान जेनरेट करना अनिवार्य है। भुगतान के पश्चात रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए और पोर्टल पर ‘Payment History’ में जाकर इसका सत्यापन कर लेना चाहिए।
1 अगस्त से सेक्शन 234F के तहत लेट फीस और नुकसान
1 अगस्त या उसके बाद रिटर्न दाखिल करने पर धारा 234F के तहत विलंब शुल्क लागू होगा। जिन करदाताओं की कुल आय 5 लाख रुपये तक है, उन्हें 1,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। वहीं, 5 लाख रुपये से अधिक की कुल आय पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। समय पर रिटर्न फाइल न करने का एक बड़ा नुकसान यह भी है कि करदाता अपने कारोबारी या अन्य घाटों (Losses) को अगले वित्तीय वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकेंगे, हालांकि मकान संपत्ति (हाउस प्रॉपर्टी) से हुए नुकसान के मामले में यह नियम लागू नहीं होता।
30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य
रिटर्न जमा करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-verify) करना अनिवार्य है, अन्यथा रिटर्न अमान्य माना जाएगा। इसे आधार OTP, नेट बैंकिंग या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से तुरंत पूरा किया जा सकता है। अंतिम घंटों में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक होने पर डेस्कटॉप का उपयोग करने, ब्राउजर में प्राइवेट या इनकॉग्निटो (Incognito) विंडो खोलने और फॉर्म 16, AIS एवं बैंक स्टेटमेंट पास रखने की सलाह दी गई है। किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या होने पर रात 11:59 बजे से पहले विभाग के 24×7 हेल्पडेस्क से संपर्क किया जा सकता है।
