क्रूड ऑयल $104 के पार: 15 मई से पहले महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल; तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का नुकसान

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार, 11 मई को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे भारत समेत कई देशों में ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच वॉशिंगटन समर्थित शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य अधिकतर समय बंद रहने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।

Crude Oil Price Today
Crude Oil Price Today

Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 11 मई को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे भारत समेत कई देशों में ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच वॉशिंगटन समर्थित शांति प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बन सकी, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य अधिकतर समय बंद रहने से वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई। इन घटनाओं का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा और कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं।

ब्रेंट क्रूड वायदा 3.18 डॉलर की बढ़त के साथ 104.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 3.92 डॉलर चढ़कर 99.34 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले भी पिछले कारोबारी सत्र में दोनों बेंचमार्क में तेजी दर्ज की गई थी, जिससे साफ है कि बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा आने पर वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतें तुरंत बढ़ जाती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर भी बाजार की नजर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में चीन के ईरान के साथ व्यापारिक रिश्तों, तेल खरीद और हथियार आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। अगर इस दिशा में कोई सख्त रुख सामने आता है तो तेल बाजार में और अस्थिरता देखी जा सकती है।

भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। खबरों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को मौजूदा खुदरा कीमतों पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लागत बढ़ने और बिक्री कीमतों में अंतर बढ़ने से कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सप्लाई संकट की आशंका के बीच आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। भारत में भी लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर अगले कुछ दिनों में सरकारी फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

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