Donald Trump China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज से अपने तीन दिवसीय ऐतिहासिक चीन दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। 13 मई से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई गंभीर द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। हालांकि, बीजिंग के लिए उड़ान भरने से पहले ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर बेहद सख्त और दोटूक रुख अपनाकर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान संकट को सुलझाने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की मध्यस्थता या मदद की आवश्यकता नहीं है।
ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, अन्यथा उसे इसके ‘बुरे अंजाम’ भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य शक्ति अब काफी कमजोर हो चुकी है और अमेरिका केवल एक ‘अच्छी डील’ करने के पक्ष में है, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में हो। रोचक बात यह है कि ट्रंप ने इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के भी बहुत जल्द समाप्त होने का बड़ा दावा किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बेहद महत्वपूर्ण चीन दौरे में उनके साथ अमेरिका का एक बहुत ही हाई-प्रोफाइल और शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल भी बीजिंग जा रहा है। इस डेलिगेशन में न केवल प्रशासन के बड़े अधिकारी शामिल हैं, बल्कि ट्रंप के परिवार के सदस्य भी इसका हिस्सा हैं। उनके बेटे एरिक ट्रंप और बहू लारा ट्रंप विशेष रूप से इस दौरे पर उनके साथ मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कूटनीतिक और सुरक्षा के मोर्चे पर रणनीतियां बनाने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सेक्रेटरी पीट हेगसेथ को इस डेलिगेशन की सबसे मुख्य कड़ी माना जा रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एम्बेसडर जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर और स्टीवन चेउंग जैसे अनुभवी कूटनीतिज्ञों के साथ-साथ जेम्स ब्लेयर, ब्यू हैरिसन, रॉबर्ट गेब्रियल, माइकल क्रैट्सियोस, रॉस वर्थिंगटन, वॉल्ट नौटा और एम्बेसडर मोनिका क्राउली जैसे दिग्गजों के नाम भी शामिल हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि यद्यपि वह शी जिनपिंग के साथ ईरान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे, लेकिन यह उनके मुख्य एजेंडे की प्राथमिकता नहीं है। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका ईरान के मामले में खुद को निर्णायक स्थिति में देख रहा है। ट्रंप ने इस मौके पर यह भी साझा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस साल के अंत तक अमेरिका के दौरे पर आएंगे, जो दोनों महाशक्तियों के बीच संवाद के निरंतर बने रहने का संकेत है। अब पूरी दुनिया की निगाहें बीजिंग में होने वाली इस महामुलाकात पर टिकी हैं कि क्या इससे ईरान मुद्दे पर कोई नई दिशा निकलती है या नहीं।
