कोलकाता: सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। सत्ता संभालते ही नई सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में छह बड़े फैसले लिए, जिनका असर कानून-व्यवस्था, रोजगार, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा फैसला राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए लिया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि वर्ष 2015 के बाद से लंबित पड़ी सभी सरकारी भर्तियों को अब तेज गति से शुरू किया जाएगा। पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में देरी, अनियमितता और धांधली के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में नई सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अब सभी नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पूरी की जाएंगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना को राज्य में लागू करने का फैसला किया है। इससे लाखों लोगों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने भारतीय न्याय संहिता को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है। यह संहिता देश की नई आपराधिक न्याय व्यवस्था का हिस्सा है और इसके लागू होने से राज्य की कानूनी प्रणाली में बदलाव देखने को मिल सकता है।
सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी नई सरकार ने सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। चूंकि पश्चिम बंगाल की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों से जुड़ी हैं, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
प्रशासनिक सुधारों के तहत एक और अहम फैसला लिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में राज्य के अधिकारियों की केंद्रीय प्रशिक्षण और प्रतिनियुक्ति पर लगी रोक को हटाया गया है। अब राज्य के IAS अधिकारी और IPS अधिकारी केंद्रीय ट्रेनिंग ले सकेंगे, जिससे प्रशासनिक क्षमता और समन्वय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के ये शुरुआती फैसले आने वाले समय में राज्य की दिशा तय कर सकते हैं। खासतौर पर रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों का असर सीधे आम जनता पर दिखाई दे सकता है।
