उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों के साथ चुनावी तालमेल को लेकर अपनी बात फिर रखी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को साथ आने का प्रस्ताव दिया है। कैराना में सभा के दौरान उन्होंने दोनों दलों की राजनीति पर सवाल उठाए, जबकि शामली में कहा कि उनकी पार्टी योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती। ओवैसी ने यह भी कहा कि जो दल योगी को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ आ सकते हैं।
शामली की सभा में ओवैसी ने मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए कहा, “जब तक अब्दुल नेता नहीं बनेगा, इन मसलों का हल नहीं होगा।” उन्होंने बिहार में गठबंधन की कोशिशों का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के सामने भी साथ आने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन दोनों दलों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कैराना में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। खुद की तुलना रावण से किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बीजेपी और आरएसएस की भाषा बोल रहे हैं। ओवैसी ने मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर भी सपा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर पार्टी को 90 फीसदी मुस्लिम वोट मिलते हैं, तो उससे सवाल भी किए जाएंगे।
ओवैसी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की बात पहले भी उठा चुके हैं। उन्होंने सपा और कांग्रेस को गठबंधन पर विचार करने के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया था। हालांकि, उनके प्रस्ताव पर दोनों दलों की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने की बात सामने आई। ओवैसी के साथ गठबंधन को लेकर विपक्षी दलों की हिचकिचाहट की एक वजह यह धारणा भी है कि AIMIM की मौजूदगी से विपक्षी वोटों में बंटवारा हो सकता है। इसी कारण विरोधी दल कई बार उनकी पार्टी को ‘वोट कटवा’ कहते रहे हैं।
दूसरी ओर, अखिलेश यादव से जब गठबंधन के सवाल पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, तो उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी उस गठबंधन को आगे बढ़ाएगी, जिसने बीजेपी को हराया था। इस बयान से सपा की गठबंधन संबंधी प्राथमिकता का संकेत मिला था, हालांकि इससे ओवैसी के प्रस्ताव पर कोई सीधा फैसला स्पष्ट नहीं हुआ।
इसके अलावा, दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर भी ओवैसी ने बयान दिया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेताओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनके इन बयानों के बीच उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन और मुस्लिम मतदाताओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
