भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को जानकारी दी है कि बल ने चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी युद्ध-तैयारी को और अधिक मजबूत करने के लिए ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई विशेष लड़ाकू इकाई तैयार की है। इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर चीनी पीएलए (PLA) के साथ चल रहे गतिरोध के दौरान अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं को पूरी तरह साबित किया है। आईटीबीपी प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि हर बॉर्डर बटालियन में इन कमांडो की तैनाती की जाएगी, क्योंकि चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करने के लिए अब पारंपरिक युद्ध के तरीके पर्याप्त नहीं हैं।
65वें स्थापना दिवस से पहले अलवर में संबोधन
आईटीबीपी के 24 अक्टूबर को आने वाले 65वें स्थापना दिवस से ठीक पहले राजस्थान के अलवर स्थित बेस पर जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक कपूर ने कहा कि बल अपने आधुनिकीकरण अभियान को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें नई युद्ध तकनीकों और विशेष प्रशिक्षण पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से मिले भारी-भरकम फंड और योजनाओं के जरिए बल को हाई-एल्टीट्यूड माउंटेन-फाइटिंग फोर्स के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ड्रोन युद्ध और 400 करोड़ रुपये की फंडिंग
आईटीबीपी ने अपनी सीमा-रक्षक बटालियनों में विशेष ड्रोन प्लाटून का गठन किया है, जहां जवानों को ड्रोन उड़ाने और इस तकनीक को खुद विकसित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कपूर ने बताया कि सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये के फंड में से लगभग 70 प्रतिशत राशि का उपयोग सीधे तौर पर ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने में किया जा रहा है। इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने कुल 4,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसमें अकेले 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए आरक्षित हैं।
नया स्ट्राइक कोर्स और गलवान जैसी स्थितियों की तैयारी
जून 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प जैसी कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए आईटीबीपी ने एक नया ‘स्ट्राइक कोर्स’ तैयार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को इस विशेष पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। पूर्वी लद्दाख की उस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे, जबकि चीन ने भी अपने चार सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की थी।
अग्रिम मोर्चों पर बुनियादी ढांचा और कड़ाके की ठंड से मुकाबला
युद्ध प्रशिक्षण के साथ-साथ आईटीबीपी सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को भी लगातार सुदृढ़ कर रही है। संघर्ष की स्थिति में जोखिम को न्यूनतम करने के लिए अग्रिम इलाकों में भूमिगत (अंडरग्राउंड) आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं, क्योंकि सतह पर बनी संरचनाएं युद्ध के दौरान आसानी से दुश्मनों का निशाना बन सकती हैं। इसके अलावा, अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में सैनिकों की सुविधाओं के लिए बैरकों को इंसुलेट किया जा रहा है, सोलर वॉटर हीटर लगाए जा रहे हैं और दूर-दराज की चौकियों पर निर्बाध बिजली के लिए जनरेटर सेट मुहैया कराए जा रहे हैं। वाहनों को अत्यधिक ठंड में आसानी से स्टार्ट करने के लिए ‘कोल्ड-स्टार्ट किट’ भी शामिल किए गए हैं।
कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर साधे तीखे निशाने
इस बीच, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर चीन के सामने झुकने और अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर उत्पन्न तनाव को लेकर अपनी चिंताएं छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए आईटीबीपी प्रमुख के बयानों का हवाला देते हुए बल के जवानों की तो सराहना की, लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की चुप्पी पर कड़े सवाल खड़े किए।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि लद्दाख की तरह ही अरुणाचल प्रदेश में भी भारत की पहुंच कई पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक खत्म हो गई है और वे नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। उन्होंने चीन द्वारा लगातार अरुणाचल प्रदेश के कस्बों और इलाकों के नाम बदलने तथा सीमा के पास बड़े पैमाने पर बांध बनाए जाने की खबरों का जिक्र करते हुए इसे भारत की पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
