Iran-US Deal: ईरान-अमेरिका समझौते पर प्रियंका चतुर्वेदी का पाकिस्तान पर तंज, बोलीं- अमेरिका की बेइज्जती कराई

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद आखिरकार दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को लेकर पाकिस्तान अपनी भूमिका को लेकर चर्चा में है।

ईरान-अमेरिका समझौते पर प्रियंका चतुर्वेदी का पाकिस्तान पर तंज
ईरान-अमेरिका समझौते पर प्रियंका चतुर्वेदी का पाकिस्तान पर तंज

महीनों से जारी गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष के बाद आखिरकार ईरान और अमेरिका ने आधिकारिक रूप से एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस वैश्विक शांति समझौते की मध्यस्थता को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने और खूब वाहवाही बटोरने में लगा हुआ है। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के सैन्य नेतृत्व (मुनीर-शहबाज जोड़ी) पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस समझौता ज्ञापन (MoU) के जरिए पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका को शर्मिंदा करने और उसकी बेइज्जती कराने का काम किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे समझौते का विश्लेषण किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका-ईरान के बीच हुई इस उच्च स्तरीय बातचीत में साफ तौर पर ईरान का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। ईरान को हर्जाने के तौर पर पूरे 300 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि देने का वादा किया गया है, और साथ ही रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का पूरा नियंत्रण भी ईरान के पास ही सुरक्षित बना रहा। इसके अलावा, वैश्विक चिंताओं के केंद्र रहे न्यूक्लियर एनरिचमेंट (परमाणु संवर्धन) के संवेदनशील मुद्दे पर भी भविष्य में आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है, जो ईरान के लिए कूटनीतिक जीत है।

दोनों राष्ट्रपतियों ने डिजिटल माध्यम से किए हस्ताक्षर

इस बीच, समझौते की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से इस ऐतिहासिक ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (MoU) पर अपने हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अपने फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की विशेष मौजूदगी में इन दस्तावेजों को हरी झंडी दिखाई।

इस समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को नियंत्रित करते हुए तथा कूटनीति के लिए नए रास्ते खोलते हुए वह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसे दुनिया के कई बड़े कूटनीतिज्ञ अब तक पूरी तरह असंभव मान रहे थे।

‘ईरान ने किया परमाणु हथियार न बनाने का वादा’

सीनेटर एरिक श्मिट ने समझौते की खूबियां बताते हुए कहा कि इस एमओयू के तहत ईरान ने इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का लिखित वादा किया है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को आगाह करते हुए इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि यह समझौता केवल आपसी भरोसे के बजाय पूरी तरह से ‘सत्यापन और जांच’ (वेरिफिकेशन) के कड़े सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए ताकि ईरान इसका उल्लंघन न कर सके।

दूसरी तरफ, अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की एक खोजी रिपोर्ट में इस समझौते के कुछ चिंताजनक पहलुओं को भी उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ ईरान की यह शुरुआती शांति व्यवस्था तेहरान के लिए लेबनान में सक्रिय उसके सहयोगी संगठन हिज्बुल्लाह की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को फिर से मजबूत करने का एक बड़ा मार्ग खोल सकती है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इस समझौते के तुरंत बाद जैसे ही ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (रोके गए) फंड और नए तेल सौदों से भारी धनराशि प्राप्त होना शुरू होगी, वह इसका एक बड़ा हिस्सा अपने क्षेत्रीय एजेंडे में लगाएगा।

प्रतिबंधों से राहत और हिज्बुल्लाह को वित्तीय मदद की आशंका

‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ ने खुफिया और राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया कि इस एमओयू के लागू होने से ईरान को युद्ध के बाद के नए वैश्विक निवेश, आर्थिक प्रतिबंधों से बड़ी राहत और अनफ्रीज्ड फंड के रूप में सैकड़ों अरबों डॉलर का सीधा फायदा होने जा रहा है। ऐसे में कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस ‘रिकंस्ट्रक्शन फंड’ (पुनर्निर्माण कोष) का एक बड़ा हिस्सा लेबनान में हालिया संघर्ष के दौरान बुरी तरह तबाह हो चुके अपने टेरर प्रॉक्सी संगठन हिज्बुल्लाह को दोबारा खड़ा करने के लिए कर सकता है। क्षेत्र के दो बड़े राजनयिकों और वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को बहुत जल्द बड़ी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आंतरिक वादा किया है, जिससे इस समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।

हालांकि, हिज्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान उनके संगठन को हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से अपना पूरा समर्थन देता आया है, जिसमें पिछले वर्ष अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार ट्रांसफर किया गया लगभग एक बिलियन डॉलर का फंड भी शामिल है। संगठन का कहना है कि वाशिंगटन के साथ फंड की वापसी से जुड़ी कूटनीतिक व्यवस्थाएं चाहे जो भी हों, ईरान का उन्हें मिलने वाला वित्तीय और सैन्य समर्थन भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा।

बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच अमेरिकी प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर चेतावनी दी है कि ईरान अपने अंतरराष्ट्रीय अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित या आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण (फंडिंग) के लिए कतई नहीं कर सकता है। वाशिंगटन ने इस समझौते में एक सख्त क्लॉज जोड़ते हुए साफ किया है कि यदि ईरान की तरफ से इस शांति समझौते की शर्तों का जरा सा भी उल्लंघन पाया गया, तो अमेरिका इस पूरी धनराशि और राहत को तत्काल प्रभाव से फिर से पूरी तरह फ्रीज कर देगा।

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