केरल के तट पर मानसून की दस्तक, रिकॉर्डतोड़ गर्मी से राहत; IMD ने 7 जिलों में जारी किया ‘ऑरेंज अलर्ट’

देश भर में लाखों लोग हर साल की तरह केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भारत में मानसून हमेशा केरल के तट से ही प्रवेश करता है और मौसम एजेंसियों ने सोमवार को संकेत दिए हैं कि यह बहुत जल्द तट तक पहुंचने की दहलीज पर है।

तिरुवनंतपुरम: दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर पहुंचने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि मानसून जल्द ही राज्य में प्रवेश कर सकता है। इसके साथ ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले दिनों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

आईएमडी के अनुसार, मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं और राज्य में वर्षा गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। केरल में मानसून का प्रवेश पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं से यह आगे बढ़ते हुए अन्य राज्यों तक पहुंचता है। अनुमान है कि अगले दो से तीन सप्ताह में मानसून उत्तर भारत तक पहुंच जाएगा।

भारी बारिश की आशंका को देखते हुए आईएमडी ने सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर और मलप्पुरम में बुधवार और गुरुवार के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं पथानामथिट्टा और कोझिकोड जिलों में गुरुवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ इलाकों में कम समय में 11 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है। इससे शहरी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है।

राज्य के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। मानसून के आगमन के साथ तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति खराब रहने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के बाद मानसून की पहली व्यापक बारिश से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं स्थानीय निकायों ने बाढ़ और जलभराव की आशंका को देखते हुए नालों, नहरों और जल निकासी मार्गों की सफाई का काम तेज कर दिया है।

मानसून की पहली बारिश के साथ केरल का प्राकृतिक परिदृश्य बदलने की उम्मीद है। साथ ही यह देश के बड़े हिस्से में कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण वर्षा चक्र की शुरुआत भी करेगी।

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