Uday Kotak Warning: ‘कम्फर्ट जोन’ से बाहर निकले भारत, उदय कोटक ने अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच आर्थिक संकट पर चेताया

Uday Kotak at CII Summit: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता के स्वर तेज होते दिख रहे हैं। देश के दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को आगाह करते हुए कहा है कि अब समय आत्मसंतोष छोड़कर संभावित चुनौतियों के लिए तैयार रहने का है।

CII Annual Business Summit 2026: भारतीय दिग्गज बैंकर और कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने ‘CII एनुअल बिजनेस समिट 2026’ में भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबार जगत को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का आर्थिक असर अब धरातल पर दिखना शुरू होगा, इसलिए भारत को ‘सबसे खराब स्थिति’ (वॉरस्ट केस सिनेरियो) के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए। कोटक का यह संदेश उन व्यवसायों के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है जो पिछले कुछ समय से वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद राहत महसूस कर रहे थे।

उदय कोटक ने भारतीय उपभोक्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि आने वाले समय में महंगाई का एक करारा झटका लग सकता है। उनके अनुसार, पिछले दो महीनों से जारी युद्ध का पूरा आर्थिक प्रभाव अभी तक आम जनता तक नहीं पहुंचा है, क्योंकि तेल कंपनियां पुराने स्टॉक और घाटे को खुद वहन कर रही थीं। लेकिन अब ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी सीधे तौर पर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के बजट को प्रभावित करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

इस संकट से निपटने के लिए उदय कोटक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई ईंधन बचत की अपील का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था का प्रबंधन एक ‘कॉर्पोरेट बैलेंस शीट’ की तरह करना चाहिए, जिसमें अनावश्यक खर्चों और खपत को तुरंत कम करने पर जोर दिया जाए। कोटक का मानना है कि आत्मनिर्भरता का सही अर्थ किसी बाहरी देश या विदेशी निवेश पर निर्भर न होना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को विदेशी पूंजी के बजाय घरेलू स्तर पर जोखिम उठाने वाली पूंजी (डोमेस्टिक रिस्क कैपिटल) का एक मजबूत आधार तैयार करना होगा।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भारतीय बिजनेस लीडर्स को ‘स्ट्रैटेजिक पैरानोइया’ (Strategic Paranoia) अपनाने की सलाह दी। इसका अर्थ है कि संकट के पूरी तरह आने का इंतजार करने के बजाय, उसके आने की संभावना को भांपते हुए पहले से ही सुरक्षात्मक और मजबूत तैयारी कर ली जाए। कोटक के अनुसार, लंबे समय से ‘कम्फर्ट जोन’ में रहने का समय अब बीत चुका है और भारत को अपनी आर्थिक नींव को बाहरी झटकों से बचाने के लिए स्थायी और कठोर समाधान खोजने होंगे। समिट में दिया गया उनका यह भाषण वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भावी आर्थिक रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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