Railway Pensioners DR Hike: रेलवे मंत्रालय ने देश के लाखों पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) में बढ़ोतरी का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार की इस नई घोषणा के साथ ही अब पेंशनरों को मिलने वाला DR 58% से बढ़कर 60% हो गया है। यह फैसला रेलवे मंत्रालय द्वारा 7 मई 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से सार्वजनिक किया गया, जिसे पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने भी अपनी मंजूरी दे दी है।
कब से लागू होगा नया आदेश और कितना होगा फायदा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि पेंशनरों को पिछले महीनों का बकाया यानी एरियर भी दिया जाएगा। महंगाई राहत में हुई इस 2% की वृद्धि का आधार 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार तय किया गया फॉर्मूला है। महंगाई के इस दौर में पेंशनभोगियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए सरकार समय-समय पर इस तरह के संशोधन करती है।
पेंशन की राशि पर असर: एक नजर में
DR में बढ़ोतरी का लाभ सीधे तौर पर पेंशनर की बेसिक पेंशन (मूल पेंशन) पर निर्भर करेगा। जिनकी बेसिक पेंशन जितनी अधिक होगी, उनकी मासिक आय में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पेंशनर की बेसिक पेंशन 10,000 रुपये है, तो पहले उन्हें 5,800 रुपये DR मिलता था, जो अब बढ़कर 6,000 रुपये हो जाएगा। इस प्रकार उनकी कुल मासिक पेंशन 15,800 रुपये से बढ़कर 16,000 रुपये हो जाएगी।
इसी तरह, 20,000 रुपये बेसिक पेंशन वालों को अब हर महीने 400 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जिससे उनकी कुल पेंशन 32,000 रुपये हो जाएगी। 30,000 रुपये की बेसिक पेंशन पर 600 रुपये, 40000 रुपये पर 800 रुपये और 50,000 रुपये की बेसिक पेंशन पाने वाले पेंशनरों को अब हर महीने 1,000 रुपये का सीधा फायदा होगा।
अर्थव्यवस्था और लाभार्थियों पर प्रभाव
सरकार के इस फैसले का दायरा काफी व्यापक है। आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी से देश के करीब 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.27 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। हालांकि, इस राहत को प्रदान करने के लिए सरकारी खजाने पर वार्षिक रूप से लगभग 6,791.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह 2% की बढ़ोतरी रेलवे पेंशनरों के लिए एक जरूरी आर्थिक संबल साबित होगी। इससे न केवल बुजुर्गों को अपने रोजमर्रा के खर्चों को प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी पहले से अधिक सुदृढ़ होगी। यह कदम वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और उनके कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
