नई दिल्ली: युवाओं के बीच लोकप्रिय राजनेता राघव चड्ढा के लिए आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला डिजिटल मोर्चे पर काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उनके समर्थकों की नाराजगी साफ देखी जा रही है, जहां महज 24 घंटों के भीतर उनके फॉलोअर्स की संख्या 14.6 मिलियन से घटकर 13.3 मिलियन रह गई है। लगभग 10 लाख से ज्यादा यूजर्स द्वारा अनफॉलो किए जाने और कमेंट सेक्शन में #UnfollowRaghav जैसे अभियानों का चलना यह दर्शाता है कि उनके प्रशंसक इस राजनीतिक बदलाव से आहत हैं। कई यूजर्स ने इसे विश्वासघात बताते हुए अपनी निराशा व्यक्त की है।
इस दलबदल के बाद राघव चड्ढा की डिजिटल छवि को नए सिरे से गढ़ने की कोशिशों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि राघव अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से उन पुराने पोस्ट्स को व्यवस्थित तरीके से हटा रहे हैं, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा की नीतियों की आलोचना की थी। राजनीतिक विश्लेषक इसे उनकी ‘सिस्टमैटिक रीशेपिंग’ के तौर पर देख रहे हैं, ताकि वे अपनी नई पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बिठा सकें।
Almost 2 million people unfollowed Raghav Chadha in last 2-3 days pic.twitter.com/1sQtX7OCkr
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) April 26, 2026
राघव चड्ढा की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका ‘डेटा-आधारित गवर्नेंस’ और मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दों को उठाना था। उन्होंने संसद में एयरपोर्ट पर महंगे खाने, टैक्स का बोझ, टेलीकॉम रिचार्ज की बढ़ती कीमतों और डिलीवरी पार्टनर्स के अधिकारों जैसे विषयों पर प्रमुखता से बात की थी। यही वजह थी कि युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच उनकी एक अलग साख थी, जो अब इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद दांव पर लगी नजर आ रही है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को राघव चड्ढा ने राज्यसभा के दो-तिहाई सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया था। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए इसे एक वैध विलय बताया है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह कदम उन्हें अयोग्यता से बचा सकता है, लेकिन जनता और विशेषकर उनके युवा प्रशंसकों के बीच उनकी छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
