Donald Trump Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक निर्णय लेते हुए ईरान के साथ चल रहे अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को जारी एक बयान में स्पष्ट किया कि यह फैसला पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के विशेष अनुरोध पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे ईरान पर हमले रोकने की अपील की थी, ताकि कूटनीतिक बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकाला जा सके। ट्रंप ने इस कूटनीतिक पहल को एक मौका देते हुए फिलहाल सैन्य कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने फैसले के पीछे ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को भी एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने ईरानी सरकार और वहां के नेतृत्व को गंभीर रूप से विभाजित करार दिया। ट्रंप का मानना है कि इस समय सैन्य हमले रोकने से ईरान के भीतर चल रहे आपसी मतभेदों के बीच वहां की सरकार को बातचीत के लिए एक साझा और स्पष्ट रुख तैयार करने का समय मिलेगा। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक ईरान एक व्यवस्थित और एकीकृत प्रस्ताव पेश नहीं करता, तब तक सैन्य कार्रवाई पर यह रोक जारी रहेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह राहत केवल बमबारी और प्रत्यक्ष हमले पर है।
STATEMENT BY PRESIDENT DONALD J. TRUMP: pic.twitter.com/ATdRyY1qqK
— The White House (@WhiteHouse) April 21, 2026
सीजफायर की अवधि बढ़ाने के बावजूद ट्रंप ने तेहरान पर सैन्य दबाव कम करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी पहले की तरह ही सख्त बनी रहेगी। अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखेगी ताकि किसी भी तरह का प्रतिबंधित सामान या तेल का निर्यात न हो सके। ट्रंप ने अमेरिकी सेना को अपनी पोजीशन पर अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा है। उनके अनुसार, यह कूटनीतिक अवसर केवल तब तक है जब तक बातचीत की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती या ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं कर देता।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल अभी भी बना हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है क्योंकि अमेरिका चाहता है कि बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ईरान अपना रुख साफ करे। पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन समुद्री सीमाओं पर जारी तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी ने कूटनीतिक राह को बेहद कठिन बना दिया है। दुनिया भर की निगाहें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह ट्रंप की शर्तों के बीच बातचीत का कोई ठोस प्रस्ताव लेकर सामने आता है या नहीं।
