ईरान का सख्त रुख: स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने डोनल्ड ट्रंप को दी चेतावनी, वार्ता पर संकट

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन हालात लगातार उलझते जा रहे हैं। अमेरिकी धमकियों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के चलते ईरान ने फिलहाल वार्ता में शामिल होने को लेकर असमंजस जताया है।

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता और तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ‘होर्मुज नाकाबंदी’ और सख्त धमकियों के बीच ईरान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप को सीधी चेतावनी देते हुए कूटनीतिक मेज को ‘जंग के मैदान’ में बदलने का संकेत दिया है।

गालिबाफ का ट्रंप को करारा जवाब: “समर्पण नहीं करेंगे”

ईरानी स्पीकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर ट्रंप की रणनीति पर प्रहार करते हुए लिखा, “अमेरिका इस्लामाबाद वार्ता को ‘समर्पण की मेज’ में बदलने की कोशिश कर रहा है। ईरान धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करता।” उन्होंने आगे बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दबाव डालना बंद नहीं किया, तो ईरान “जंग के मैदान में नए पत्ते” (New cards on the battlefield) खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है। गालिबाफ का यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि ट्रंप ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए नाकाबंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

होर्मुज नाकाबंदी: शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा

पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने इस गतिरोध को सुलझाने के लिए सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया कि अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकाबंदी ही शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ट्रंप ने इस सलाह पर विचार करने की बात तो कही है, लेकिन साथ ही यह शर्त भी दोहराई है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी नौसेना पीछे नहीं हटेगी।

बुधवार रात 8 बजे खत्म होगा सीजफायर

वर्तमान में लागू 14 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की समयसीमा बुधवार रात 8 बजे (ET) समाप्त होने वाली है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी बमबारी दोबारा शुरू हो जाएगी। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुँचने को लेकर भी संशय बना हुआ है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन के शामिल होने की पुष्टि न होने तक अमेरिकी दल की रवानगी में देरी हो रही है।

इस्लामाबाद में सुरक्षा का सख्त पहरा

भले ही वार्ता पर संशय के बादल हों, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में लगभग 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे शहर को एक तरह से सुरक्षा लॉकडाउन में रखा गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार लगातार अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के संपर्क में हैं ताकि उन्हें वार्ता की मेज पर लाया जा सके।

अब पूरी दुनिया की निगाहें बुधवार की समयसीमा पर टिकी हैं। यदि ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि कल दोपहर तक आमने-सामने नहीं बैठते, तो मिडिल ईस्ट में एक बार फिर विनाशकारी युद्ध शुरू होने का खतरा बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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