Touska Ship Seizure: अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ा तनाव, ईरानी जहाज पर ‘ड्यूल-यूज’ सामान को लेकर विवाद गहराया

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है, जब ईरानी झंडे वाले कंटेनर जहाज ‘टूस्का’ (Touska) पर अमेरिकी बलों ने कब्जा कर लिया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत पर भी अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं।

जहाज 'टूस्का' पर अमेरिकी कब्जा
जहाज 'टूस्का' पर अमेरिकी कब्जा

Touska Ship Seizure: ओमान की खाड़ी में ईरानी कंटेनर जहाज ‘टूस्का’ (Touska) पर अमेरिकी मरीन सैनिकों की हालिया कार्रवाई ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही जारी युद्ध की आग में घी डालने का काम किया है। सोमवार को सामने आई नई रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका का दावा है कि इस जहाज पर ‘ड्यूल-यूज़’ (दोहरे इस्तेमाल) वाला सामान लदा था, जिसका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इस घटना के बाद बुधवार से प्रस्तावित शांति वार्ता के दूसरे दौर पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

क्या है ‘ड्यूल-यूज़’ सामान का विवाद?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और समुद्री सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में जहाज पर धातु, विशेष पाइप और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मिले हैं। अमेरिका इन वस्तुओं को ‘ड्यूल-यूज़’ की श्रेणी में रखता है, क्योंकि इनका इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण या सैन्य उपकरणों में भी किया जा सकता है। यह जहाज IRISL (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स) का हिस्सा है, जिसे अमेरिका ने 2019 में ही ‘मिसाइल प्रोग्राम के लिए खरीद एजेंट’ बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया था।

छह घंटे की तनातनी और अमेरिकी कार्रवाई

जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, टूस्का को चाबहार बंदरगाह के पास अमेरिकी बलों ने घेरा था। CENTCOM का कहना है कि जहाज को रुकने के लिए छह घंटे के भीतर कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन जब उसने आदेश अनसुने किए, तो मरीन सैनिकों ने फायरिंग कर उसके इंजन को निष्क्रिय कर दिया और हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि जहाज का “गैरकानूनी गतिविधियों का इतिहास” रहा है और अमेरिकी बल फिलहाल इसकी गहन तलाशी ले रहे हैं।

ईरान का पलटवार: “यह समुद्री डकैती है”

ईरान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून और हालिया युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी दी है कि जहाज, नाविकों और उनके परिवारों को तुरंत रिहा किया जाए। ईरानी सेना ने आरोप लगाया कि यह जहाज चीन से आ रहा था और उस पर नागरिक व उनके परिवार भी मौजूद थे, जिसके कारण ईरान ने संयम बरता। ईरान ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी और ऐसी “सशस्त्र डकैती” के बाद वह किसी भी दबाव में बातचीत की मेज पर नहीं आएगा।

चीन और क्षेत्रीय तनाव

इस घटना ने वैश्विक शक्तियों को भी चिंता में डाल दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बयान जारी कर ईरानी झंडे वाले जहाज को जबरन रोके जाने पर गहरी चिंता जताई है। चीन ने दोनों पक्षों से जिम्मेदारी के साथ युद्धविराम का पालन करने और समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही बहाल करने की अपील की है।

सैटेलाइट डेटा के अनुसार, टूस्का ने मार्च के अंत में चीन के ताइचांग और गाओलान बंदरगाहों से कंटेनर लोड किए थे और फिर मलेशिया होते हुए ओमान की खाड़ी पहुंचा था। फिलहाल जहाज अमेरिकी नियंत्रण में है और इसकी तलाशी जारी है। यदि जहाज पर कोई बड़ा सैन्य साजो-सामान मिलता है, तो क्षेत्र में एक बार फिर पूर्ण युद्ध छिड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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