अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी है कि अगर समझौता टूटा तो उसके खिलाफ पहले से कई गुना ज्यादा घातक कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को व्हाइट हाउस से संबोधन में ट्रंप ने कहा कि जब तक असली समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना, जहाज और हथियार ईरान के आसपास तैनात रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देगा और उसके परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह लगाम लगाना उनकी प्राथमिकता है।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अमेरिका की रणनीति साफ करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हर हाल में खुला और सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाज वहां मौजूद रहेंगे, ताकि तेल की आपूर्ति में कोई बाधा न आए और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि इस रास्ते पर किसी भी तरह का ईरानी नियंत्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और आगे की कार्रवाई के लिए आदेश का इंतजार कर रही है। उन्होंने ईरान को सलाह दी कि वह इस कूटनीतिक मौके का फायदा उठाए, क्योंकि अमेरिका की सहनशक्ति अब खत्म हो चुकी है। इस बयान को ईरान के लिए अंतिम चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर घोषित किया गया था। हालांकि, सीजफायर की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। ट्रंप पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे। उनका यह बयान ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने की अनुमति कभी नहीं देगा और क्षेत्र में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
