ईरान-अमेरिका सीजफायर संकट में: ईरान ने फिर बंद किया हॉर्मुज जलमार्ग, लेबनान में इजरायली हमले से भड़का तनाव

तेहरान। ईरान ने लेबनान पर इजरायल के हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के यातायात को रोक दिया है। यह दावा ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने किया है। एजेंसी के मुताबिक, युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक केवल दो तेल टैंकरों को ही होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की अनुमति दी गई है और दोनों जहाज ईरान से जुड़े बताए जा रहे हैं।

Strait of Hormuz Crisis
Strait of Hormuz Crisis

तेहरान/बेरूत: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के युद्धविराम समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स न्यूज’ के अनुसार, लेबनान पर इजरायल के ताजा और भीषण हमलों के विरोध में ईरान ने ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही पर फिर से रोक लगा दी है। सीजफायर लागू होने के बाद से केवल दो ईरानी टैंकरों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है, जबकि दुनिया भर के अन्य टैंकर अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और भारी तनाव के बीच आगे बढ़ने को लेकर आशंकित हैं।

सीजफायर की शर्तों पर गहराया विवाद

ईरान द्वारा जलमार्ग बंद किए जाने के इस फैसले ने अमेरिका के साथ हुए संघर्ष विराम समझौते के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अनिवार्य शर्त रखी थी। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका को संघर्ष-विराम और इजरायल के युद्ध में से किसी एक को चुनना होगा। ईरान का मानना है कि अमेरिका एक तरफ शांति की बात कर रहा है और दूसरी तरफ इजरायल के जरिए लेबनान में हमले जारी रखे हुए है। अराघची ने स्पष्ट किया कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और दुनिया उसकी प्रतिबद्धताओं को देख रही है।

लेबनान में इजरायल का अब तक का सबसे बड़ा हमला

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ युद्धविराम का समर्थन तो किया, लेकिन यह साफ कर दिया कि यह समझौता हिजबुल्लाह पर लागू नहीं होता। इसी रुख पर कायम रहते हुए इजरायली सेना ने बुधवार दोपहर मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाकों पर बिना किसी चेतावनी के भीषण हवाई हमले किए। सेना ने महज 10 मिनट के भीतर मध्य बेरूत, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हिजबुल्लाह के 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायल ने इसे मौजूदा युद्ध का सबसे बड़ा समन्वित हमला करार दिया है।

भारी तबाही और मौतों का आंकड़ा

लेबनान सरकार के दावों के मुताबिक, इजरायल की इस ताजा सैन्य कार्रवाई में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और घायलों की संख्या बहुत अधिक है। रिहायशी और वाणिज्यिक क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने से बेरूत में भारी तबाही हुई है। इस हमले ने न केवल लेबनान में मानवीय संकट को गहरा दिया है, बल्कि ईरान को भी उकसाया है, जिसके परिणामस्वरूप हॉर्मुज जलमार्ग को दोबारा बंद कर दिया गया।

अनिश्चितता के भंवर में वैश्विक अर्थव्यवस्था

समझौते की शर्तें अभी भी स्पष्ट नहीं हैं और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के दावे इजरायल के बयानों से मेल नहीं खा रहे हैं। ईरान अब इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की नई व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रहा है, जिस पर अन्य देशों की सहमति मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। हॉर्मुज जलमार्ग के फिर से बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल आने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।

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