अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के ऐतिहासिक युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए सोशल मीडिया पर कहा है कि यदि दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ इजरायली गोलीबारी तुरंत नहीं रुकी, तो उनकी वायु सेना और मिसाइल यूनिट्स सीधे तेल अवीव पर बमबारी शुरू कर देंगी। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब दुनिया इस सीजफायर से शांति की उम्मीद लगाए बैठी थी।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन इजरायल ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। इजरायली सेना और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ उनका जमीनी अभियान और लड़ाई जारी रहेगी। नेतन्याहू के अनुसार, यह दो हफ्तों का संघर्ष-विराम लेबनान पर लागू नहीं होता है। इजरायल इस शर्त पर ट्रंप के फैसले का समर्थन कर रहा है कि ईरान तुरंत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे और क्षेत्र में होने वाले हमलों को रोके।
BREAKING: The Iranian National Security Council:
— Iran News 24 (@IRanMediaco) April 8, 2026
"Within a few hours, if the firing does not stop in southern Lebanon, the air and missile unit will bomb Tel Aviv.."
दूसरी तरफ, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस 14 दिनों के समझौते को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। ईरान ने शुरुआत में इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का संकेत दिया था और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो वे भी सैन्य कार्रवाई रोक देंगे। लेकिन अब ईरान का रुख कड़ा हो गया है और उसका कहना है कि जंग में उसका साथ देने वाले हिज्बुल्ला के खिलाफ भी इजरायल को अपने हमले बंद करने होंगे।
फिलहाल हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं क्योंकि एक तरफ इजरायल लेबनान में पीछे हटने को तैयार नहीं है और दूसरी तरफ ईरान ने तेल अवीव को निशाना बनाने की बात कह दी है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता में शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या यह 14 दिनों का सीजफायर अपनी समय सीमा पूरी कर पाएगा या क्षेत्र फिर से भीषण बमबारी की चपेट में आ जाएगा।
