मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका और इजरायल की युद्ध रणनीति पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के खिलाफ शुरू की गई इस जंग का मकसद अब बदलता हुआ नजर आ रहा है और यह स्पष्ट नहीं रह गया कि आखिर इस संघर्ष का अंतिम लक्ष्य क्या है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने लिखा कि अब ऐसा लगता है कि युद्ध का उद्देश्य सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना रह गया है, जबकि जंग शुरू होने से पहले यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से चालू था। उनके इस बयान को अमेरिका की रणनीति पर सीधा सवाल माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि पहले संकट पैदा किया गया और अब उसी को हल करने की कोशिश को उपलब्धि बताया जा रहा है।
दरअसल, ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तेहरान ने इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार दोनों के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाती है।
इसी बीच पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका देश मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है और शांति बहाली में भूमिका निभाने को तैयार है। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ सीधे बातचीत के पक्ष में नहीं है और किसी भी तरह की बातचीत फिलहाल मध्यस्थों के जरिए ही संभव है।
कुल मिलाकर, जहां एक तरफ जंग जारी है, वहीं दूसरी ओर बयानबाज़ी और कूटनीतिक कोशिशें यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले समय में इस संघर्ष का रुख बदल सकता है।
