पीएम मोदी ने लोकसभा में रखा भारत का ‘एनर्जी सुरक्षा प्लान’, मिडिल ईस्ट संकट के बीच तेल निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति तैयार

ईरान-इजरायल युद्ध से पैदा हुए वैश्विक संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में संभावित तेल संकट से निपटने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रही है, जिसे शॉर्ट टर्म, मिडियम टर्म और लॉन्ग टर्म में बांटा गया है।

Narendra Modi
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक तेल संकट पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश के सामने अपनी रणनीति साझा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने भविष्य में किसी भी बड़े तेल संकट से बचने के लिए खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता कम करने का एक ठोस प्लान तैयार किया है। इस रणनीति को सरकार ने तीन स्तरों—शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म—में विभाजित किया है। पीएम मोदी ने सदन को बताया कि भारत अब कच्चे तेल के लिए केवल पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई नए देशों के साथ संपर्क कर अपने आयात विकल्पों का विस्तार कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सामरिक महत्ता और वहां पैदा हुई चुनौतियों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की कुल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें कच्चा तेल, गैस और उर्वरक शामिल हैं, इसी रास्ते से आता है। युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही काफी कठिन हो गई है, लेकिन सरकार के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि भारत अपनी 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और देश के भीतर भी एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने पर तेजी से काम हो रहा है।

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग और हरित ऊर्जा की सफलताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में इथेनॉल ब्लेंडिंग की क्षमता 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे हर साल 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल कम खरीदना पड़ रहा है। इसके साथ ही रेलवे के विद्युतीकरण ने सालाना 180 करोड़ लीटर डीजल के आयात की बचत की है। प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का भी ब्यौरा दिया, जिसमें देश की क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है। उन्होंने भविष्य के लिए नाभिकीय ऊर्जा और जलविद्युत परियोजनाओं को भी प्रोत्साहित करने की बात कही, ताकि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभेद्य बनी रहे।

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