संसद का बजट सत्र: लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर घमासान, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार, 9 मार्च 2026 से शुरू हो गया है और पहले ही दिन राजनीतिक माहौल गर्म होता दिखाई दे रहा है। इस चरण में ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।

Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत आज एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के साथ हुई है। इस चरण का सबसे प्रमुख और विवादित मुद्दा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने का विपक्षी प्रस्ताव है। विपक्षी दल जहाँ एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर विदेशी नीति और महंगाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि ‘फ्लोर लीडर्स’ की बैठक में यह तय किया जाएगा कि सदन में इस प्रस्ताव को लेकर आगे किस तरह बढ़ना है।

अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में देश की विदेशी नीति को गिरवी रख दिया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है और हमारे कई नागरिक विदेशों, विशेषकर खाड़ी देशों के युद्ध में फंसे हुए हैं, वे अपने त्योहार तक नहीं मना पाए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारत सरकार इन नागरिकों की सुरक्षा और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में इन तमाम गंभीर विषयों पर चर्चा होगी और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

संविधान के नियमों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया काफी विशेष और चुनौतीपूर्ण होती है। आज सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के तीन सदस्य—मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि—इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए सदन की अनुमति मांगेंगे। नियम यह कहता है कि पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर कम से कम 50 सदस्यों को इस नोटिस के समर्थन में सदन में खड़ा होना होगा। यदि निर्धारित संख्या में सदस्य समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो यह प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकेगा। लेकिन यदि समर्थन मिल जाता है, तो इस पर विस्तृत चर्चा और फिर मतदान कराया जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ओम बिरला सदन में उपस्थित रह सकते हैं और मतदान में भी हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर पाएंगे। वे संभवतः सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्तियों में बैठेंगे। हालाँकि, वर्तमान लोकसभा में संख्या बल स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी और सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि विपक्ष का यह प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके बावजूद, कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने-अपने सांसदों के लिए ‘व्हिप’ जारी कर उन्हें सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

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