Jharkhand Air Ambulance Crash: झारखंड के चतरा जिले में मंगलवार शाम एक दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सिमरिया थाना क्षेत्र के केंदू कसारी स्थित करम टॉड़ के घने जंगल में रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, एयर एम्बुलेंस गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए रांची से दिल्ली ले जा रही थी। संजय कुमार चंदवा कस्बे में एक छोटा-सा रेस्टोरेंट चलाते थे। सोमवार को उनके होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिसमें वे करीब 63 से 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था।
परिवार ने बेहतर इलाज की उम्मीद में करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एम्बुलेंस बुक की थी। इसके लिए लोन लिया गया और रिश्तेदारों से कर्ज भी जुटाया गया। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मौसम अचानक खराब हो गया। तेज हवाओं और कम दृश्यता के कारण विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के दुर्गम जंगल में जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि किसी को संभलने या बचने का मौका नहीं मिला।
इस दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई। मृतकों में संजय कुमार, उनकी पत्नी बसंती देवी और उनका भांजा ध्रुव शामिल हैं। इनके अलावा पायलट स्वराज दीप सिंह, सह-पायलट विवेक, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा की भी मौत हो गई। अचानक हुई इस त्रासदी से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
परिजनों ने बताया कि उन्हें हादसे की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। एयर एम्बुलेंस के रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद परिवार के लोग घर लौट आए थे। कुछ देर बाद जब उन्होंने फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो कॉल नहीं लग पाया। इसके बाद विमान दुर्घटना की खबर सामने आई और प्रशासन से संपर्क करने पर सभी के मौत की पुष्टि हुई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विमान ने शाम करीब 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। खराब मौसम के कारण रूट डायवर्ट करने की कोशिश के दौरान करीब 23 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क टूट गया। विमान सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर घने और दुर्गम जंगल में गिरा, जिससे राहत और बचाव कार्य में भारी दिक्कतें आईं।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और एसएसबी की 35वीं बटालियन के जवान मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू टीम को मलबे तक पहुंचने के लिए घने जंगल में पैदल जाना पड़ा। जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला और करीब चार किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर सड़क तक लाए, जहां से एंबुलेंस के जरिए उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरी पीड़ा का कारण बन गया है। कर्ज लेकर इलाज की कोशिश कर रहे परिवार के सपने इस दुर्घटना के साथ ही टूट गए, और पीछे रह गईं सिर्फ यादें और गहरा मातम।
