अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में गुरुवार को एक संशोधित विधेयक पेश किया जाना है। प्रस्तावित कानून में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत और चीन समेत कई देशों को इस प्रस्ताव के दायरे में शामिल किया जा रहा है।
भारत और चीन पर भी लग सकता है 100% टैरिफ
प्रस्तावित संशोधित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से होने वाला कच्चे तेल का कारोबार यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करता है।
गुरुवार को अमेरिकी संसद में इस विधेयक पर वोटिंग होनी है। संशोधन के बाद भारत और चीन सहित कई देशों को उन देशों की सूची में शामिल किया जा रहा है, जिन पर प्रस्तावित माध्यमिक टैरिफ लगाया जा सकता है।
10 देशों को विधेयक में शामिल करने का प्रस्ताव
संशोधित विधेयक में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक का नाम भी जोड़े जाने का प्रस्ताव है। ये वे देश हैं, जिनके रूस के साथ तेल कारोबार को लेकर अमेरिकी सरकार की नजर है।
अगर प्रस्तावित प्रावधान लागू होता है, तो रूस से तेल खरीदने वाले इन देशों को 100 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, यह प्रावधान फिलहाल प्रस्तावित विधेयक का हिस्सा है।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की आपत्ति क्यों?
रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 से युद्ध जारी है। इसे खत्म कराने के लिए कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक कर चुके हैं, लेकिन यह वार्ता भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची।
अब अमेरिका रूस की आय के स्रोतों पर दबाव बढ़ाने की दिशा में कदम उठाता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि रूस को दूसरे देशों से लगातार आर्थिक संसाधन मिलते रहने तक युद्ध जारी रहने की स्थिति बनी रह सकती है।
इसी बीच नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों से ट्रंप के टैरिफ का विरोध करने की बात कही थी। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत और चीन के लिए भी अहम हो गया है।
