वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों का सीधा मकसद ईरान की ड्रोन, मिसाइल और समुद्री निगरानी क्षमताओं को पूरी तरह से ध्वस्त करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रखा जा सके।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह पूरा सैन्य अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देशों पर चलाया जा रहा है। अमेरिकी सेना का दावा है कि योजनाबद्ध तरीके से किए जा रहे इन हमलों से ईरानी सेना की पलटवार करने की क्षमता लगातार कमजोर हो रही है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने भी अमेरिकी हमलों की पुष्टि की है। खबरों के अनुसार, ताजा हवाई हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक तटीय क्षेत्रों और द्वीपों पर भारी तबाही हुई है। मुख्य रूप से बंदर अब्बास, किश द्वीप, बुशहर प्रांत के जम शहर और क़ेश्म द्वीप में रातभर मिसाइलें गिरने और बेहद जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
At 4:45 p.m. ET today, U.S. Central Command began launching the third consecutive night of strikes against Iran, at the Commander in Chief's direction. These strikes will continue imposing a heavy cost on Iranian forces and degrade their ability to attack innocent civilians and…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 13, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कार्रवाई अभी रुकने वाली नहीं है। ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि यह पूरा ऑपरेशन दो से तीन सप्ताह तक खिंच सकता है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी देते हुए उसके बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड बेस को निशाना बनाने का संकेत दिया। ट्रंप ने ईरान के पहाड़ों को काटकर भीतर बनाए गए अत्यधिक सुरक्षित बंकर ‘कुह-ए-कोलांग गज-ला’, जिसे दुनिया ‘पिकऐक्स माउंटेन’ के नाम से जानती है, का विशेष रूप से जिक्र किया। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान ने पहाड़ों के भीतर जो ठिकाने छुपा रखे हैं, वे भी अमेरिकी पहुंच से दूर नहीं हैं और ईरान को अगले कड़े कदम के लिए तैयार रहना चाहिए।
इस युद्ध के बीच सबसे बड़ा संकट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लाइफलाइन कहे जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खड़ा हो गया है। अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर ईरान के खिलाफ फिर से कड़ी नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि अब किसी भी ईरानी जहाज या ऑयल टैंकर को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने एक चौंकाने वाला आर्थिक फैसला सुनाते हुए कहा कि इस रास्ते से गुजरने वाले अन्य देशों के व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के बदले अमेरिका 20 फीसदी सुरक्षा शुल्क वसूलेगा। खुद को “गार्जियन ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” घोषित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा और व्यापार को चालू रखने के लिए अमेरिका यह भारी जोखिम उठा रहा है, इसलिए यह शुल्क पूरी तरह जायज है। आपको बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वो संवेदनशील गलियारा है, जहां से पूरी दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत कारोबार होता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में दो टूक कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का कोई वैध नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी सेना ने वहां मौजूद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, एंटी-शिप मिसाइलों और नौसैनिक ठिकानों को पंगु बना दिया है। हालांकि, ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। IRGC ने पलटवार करते हुए कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से ईरान के संप्रभु अधिकार क्षेत्र और सुरक्षा घेरे में आता है। इस क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी और हस्तक्षेप पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ और अवैध है और वे अपनी धरती की रक्षा करना अच्छे से जानते हैं।
मिडिल ईस्ट में भड़के इस गंभीर संकट और युद्ध जैसे हालातों पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बयान जारी कर कहा कि यदि दोनों देशों के बीच यह तनाव और ज्यादा बढ़ा, तो इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर अत्यंत विनाशकारी और आत्मघाती परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों से तुरंत युद्ध रोकने, अधिकतम संयम बरतने और इस संकट का कूटनीतिक समाधान खोजने की भावुक अपील की है।
