Project Freedom: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे विदेशी जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा करते हुए कहा कि कई जहाज भोजन, ईंधन और जरूरी सामान की कमी से जूझ रहे हैं, इसलिए मानवीय आधार पर यह कदम उठाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान इस अभियान में बाधा डालता है तो अमेरिका सख्त जवाब देगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह अभियान बेहद व्यापक है। इसमें मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, ड्रोन और लगभग 15 हजार सैनिक तैनात किए गए हैं। कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि यह मिशन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइनों में से एक है।
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल, बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस और उर्वरक की सप्लाई होती है। 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद से इस समुद्री मार्ग पर तनाव बना हुआ है और जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण छोड़ने वाला नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने कहा कि हालात युद्ध से पहले जैसे नहीं होंगे। ईरानी मीडिया के अनुसार कुछ जहाजों को दस्तावेज जांच के नाम पर रोका गया है। वहीं ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने हालिया घटनाओं को समुद्री हमलों की कड़ी बताया है।
हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसा समाधान निकल सकता है जो सभी पक्षों के हित में हो। अमेरिका ने ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर जवाब भी भेजा है, जिसकी समीक्षा तेहरान कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ सफल रहता है तो होर्मुज में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। वहीं अगर अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ती है तो युद्धविराम और वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग पर टिकी हैं।
