सूडान में लंबे समय से जारी विनाशकारी गृहयुद्ध अब एक और बड़े और खौफनाक मानवीय संकट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने देश के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हिस्से नॉर्थ कोर्डोफान की राजधानी अल-ओबेद को तीन तरफ से पूरी तरह घेर लिया है।
जमीनी सूत्रों के मुताबिक, उत्तर और पश्चिम दिशा से आरएसएफ की सेनाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं, जबकि इस घेराबंदी के बीच हुए भीषण ड्रोन हमलों में पांच प्रमुख ऑयल टैंक फार्म पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि अल-ओबेद में बड़े पैमाने पर नरसंहार हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह महज एक अंदेशा नहीं है, बल्कि यह आशंका अल-फाशर के उस भयानक अनुभव पर आधारित है, जहां अक्टूबर 2025 में आरएसएफ के कब्जे के बाद संयुक्त राष्ट्र की जांच में व्यवस्थित नरसंहार के पुख्ता सबूत मिले थे। अब अल-ओबेद भी उसी विनाशकारी रास्ते पर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।
भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से अल-ओबेद सूडान के मध्य भाग में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण शहर है, जो पूरे पश्चिमी दारफुर को देश के पूर्वी इलाकों से जोड़ने वाले मुख्य हाईवे पर स्थित है। इसके साथ ही सूडान की मुख्य ऑयल पाइपलाइन भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है, जिसके कारण इस शहर की अहमियत दोनों पक्षों के लिए बहुत ज्यादा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरएसएफ इस शहर पर अपना नियंत्रण स्थापित करने में कामयाब हो जाता है, तो पूरे पश्चिमी सूडान पर उसकी पकड़ पूरी तरह मजबूत हो जाएगी और राजधानी खार्तूम के बाद यह इस विद्रोही गुट की सबसे बड़ी क्षेत्रीय जीत होगी। इस बड़ी घेराबंदी का जवाब देने के लिए सूडानी आर्म्ड फोर्सेज (SAF) लगातार हवाई हमले कर रही है, लेकिन इसके बावजूद आरएसएफ का दबाव कम नहीं हो रहा है और माना जा रहा है कि अगले 72 घंटों के भीतर शहर पर एक बड़ा और निर्णायक हमला हो सकता है।
यह खूनी संघर्ष अप्रैल 2023 से लगातार जारी है, जिसमें अब तक लाखों बेगुनाह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस युद्ध के कारण 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर हुए हैं, जिसने इसे वर्तमान समय में दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बना दिया है। देश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी करीब 3.3 करोड़ लोग इस समय बुनियादी मानवीय मदद के लिए तरस रहे हैं, जहां भुखमरी, महामारियां और युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा रही यौन हिंसा बेहद आम हो चुकी है।
🚨🇸🇩 This is what a siege looks like right before a genocide. Sudan's next one may be starting now.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) June 26, 2026
The Rapid Support Forces are closing in on El Obeid from the north and west. Drones already hit 5 oil tank farms.
The U.S. is warning that "mass atrocities" could be next.… https://t.co/u3vK0qG8c7 pic.twitter.com/COm5yEdFtb
अक्टूबर 2025 में जब आरएसएफ ने अल-फाशर पर कब्जा किया था, तब संयुक्त राष्ट्र के फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि वहां जागावा और फुर समुदायों को विशेष रूप से निशाना बनाकर उनकी सामूहिक हत्याएं की गईं, महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए और लोगों को जबरन गायब कर दिया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि विद्रोही सेना ने 18 महीने की घेराबंदी के दौरान जानबूझकर ऐसे हालात पैदा किए जिससे इन समुदायों को पूरी तरह मिटाया जा सके, और अब अल-ओबेद में भी बिल्कुल वैसी ही रणनीतिक तैयारी देखी जा रही है।
आरएसएफ की इस क्रूर कार्यप्रणाली का इतिहास काफी पुराना है, जो पहले दारफुर क्षेत्र में सक्रिय जांजावीड नाम के एक जनजातीय मिलिशिया के रूप में जाना जाता था और बाद में एक अर्धसैनिक बल में तब्दील हो गया। अब सत्ता पर काबिज होने की इस जंग में सूडान की आधिकारिक सेना और आरएसएफ दोनों ही विभिन्न विदेशी शक्तियों से सैन्य और वित्तीय समर्थन ले रहे हैं, जिसने पूरे देश को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
देश के अधिकांश अस्पताल मलबे में तब्दील हो चुके हैं, स्कूल पूरी तरह बंद हैं और लाखों बच्चे कुपोषण के कारण मौत के कगार पर हैं। इस भयावह स्थिति के बावजूद वैश्विक मंच पर सूडान के इस बड़े संकट को दुनिया का सबसे कम मीडिया कवरेज मिलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर ठोस कार्रवाई की गति बेहद धीमी है। यदि अल-ओबेद को समय रहते नहीं बचाया गया, तो यह सूडान के युद्ध को एक और अधिक हिंसक और अंतहीन दौर में धकेल देगा, जहां भुखमरी और विस्थापन के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अमेरिका ने आरएसएफ से इस हमले को तुरंत रोकने की मांग की है, ताकि अल-ओबेद को इतिहास के अगले बड़े नरसंहार का केंद्र बनने से रोका जा सके।
