ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कतर ने बड़ा संदेश दिया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा है कि गल्फ देशों को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे देशों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खुद को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सैन्य मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया, लेकिन साफ किया कि केवल बाहरी सहयोग के भरोसे क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
अबू धाबी में आयोजित हिली फोरम में बोलते हुए अल-अंसारी ने कहा कि गल्फ देशों को अपनी सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उनके मुताबिक, अमेरिका और दूसरे सहयोगी देशों की मदद महत्वपूर्ण है, लेकिन खाड़ी देशों को अपनी रक्षा की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा खुद उठाने में सक्षम होना चाहिए।
ईरानी हमलों के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
कतर में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना मौजूद है, जो अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्रीय मुख्यालय के तौर पर भी काम करता है। ईरान की जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के दौरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्यकर्मियों और दूतावास से जुड़े कर्मचारियों को क्षेत्र से बाहर ले जाया गया।
अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक एवरिल हेन्स ने भी पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि क्षेत्र में अमेरिकी संसाधनों और सैन्य मौजूदगी में बहुत ज्यादा कटौती करने से स्थिति और जटिल हो सकती है।
ईरान के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है कतर
कतर ने ईरान के साथ संबंधों को लेकर भी बातचीत और भरोसा बहाल करने पर जोर दिया है। अल-अंसारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास फिर से कायम करने में वक्त लगेगा, लेकिन यह प्रयास जरूरी है क्योंकि ईरान भविष्य में भी गल्फ देशों का पड़ोसी बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि कतर सही समय आने पर ईरान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए तैयार है। हालांकि, इसके साथ ही देश अपनी प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा और अपनी रक्षा करने की क्षमता को भी मजबूत करेगा। अल-अंसारी ने ईरान से भी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर और शांतिपूर्ण संबंधों की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
कतर का कहना है कि सैन्य दबाव या दूसरे तरीकों से दबाव बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना ज्यादा प्रभावी रास्ता हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्या बोला कतर?
गल्फ क्षेत्र में तनाव का असर दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर भी पड़ रहा है। अल-अंसारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय तक इस तरह के संघर्ष को जारी रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने और गल्फ क्षेत्र के ऊपर मिसाइलों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की ओर से यह संकेत दिया गया था कि वैकल्पिक तेल पाइपलाइन तैयार होने के बाद करीब दो वर्षों में होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत कम हो सकती है। हालांकि, कतर इस आकलन से सहमत नहीं है। अल-अंसारी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट हजारों वर्षों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अहम मार्ग रहा है और किसी एक घटना या मौजूदा परिस्थिति से इसकी वैश्विक भूमिका खत्म नहीं हो सकती।
प्रतिबंधों के बजाय बातचीत पर जोर
ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की रणनीति पर भी कतर ने सवाल उठाए हैं। अल-अंसारी ने इराक और लीबिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां प्रतिबंधों के जरिए अपेक्षित नतीजे हासिल नहीं हो सके।
उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थायी और स्वीकार्य समाधान सैन्य दबाव या आर्थिक प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर ही निकाला जा सकता है। कतर का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर पूरे गल्फ क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा ढांचे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है।
