शंघाई: नौकरी और करियर को लेकर बढ़ती चिंता अब चीन के युवाओं को आध्यात्मिक सहारे की तरफ भी ले जा रही है। शंघाई जैसे बड़े शहर में कुछ युवा रोजगार, तरक्की और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद लेकर मंदिरों का रुख कर रहे हैं। करीब 1,700 साल पुराने लोंगहुआ मंदिर में इन दिनों ऐसे युवाओं की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।
युवा यहां अगरबत्ती जला रहे हैं, मंत्रों का जाप कर रहे हैं और बौद्ध प्रतिमाओं के सामने प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोंगहुआ मंदिर को करियर में सफलता के लिए प्रार्थना करने वाली जगह के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर आने वालों की उम्मीदों में नई नौकरी, बेहतर करियर और आर्थिक मजबूती जैसी इच्छाएं शामिल हैं।
इस रुझान के पीछे चीन के युवाओं के बीच रोजगार को लेकर बढ़ती बेचैनी को एक वजह माना जा रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां नौकरी हासिल करना आसान नहीं रह गया है। कुछ युवा इस कदर काम से दूर हो गए हैं कि रोजाना करीब 600 रुपये खर्च करके नकली ऑफिस तक जा रहे हैं, ताकि उन्हें काम करने जैसा माहौल मिल सके।
रोजगार की मुश्किलों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी युवाओं की चिंता बढ़ा रही है। कुछ लोगों को नौकरी मिलने के बाद भी अपने भविष्य को लेकर भरोसा नहीं है। वहीं, नौकरी के अवसरों में कमी और वेतन में ठहराव जैसी परिस्थितियां भी उनके सामने अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। ऐसे माहौल में कुछ युवा करियर की कोशिशों के साथ आध्यात्मिक रास्ते में भी सहारा तलाश रहे हैं।
26 वर्षीय Kacie Kang भी लोंगहुआ मंदिर पहुंचीं। उन्होंने एक केमिकल ट्रेडिंग कंपनी में नई नौकरी शुरू की है और प्रोबेशन के दौरान नए ग्राहक तलाशने को लेकर चिंतित हैं। इससे पहले की नौकरी में उनका काम लगातार बढ़ता गया, लेकिन वेतन में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई।
मंदिर में युवा अपनी इच्छाओं को लाल रिबन पर लिखकर भी छोड़ रहे हैं। किसी की कामना नौकरी में सफलता की है तो कोई परीक्षा में अच्छे परिणाम की उम्मीद लेकर पहुंच रहा है। यानी मंदिर में आने वालों में सिर्फ नौकरीपेशा युवा ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी भी शामिल हैं।
23 वर्षीय Li Yongqing कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के करीब एक साल बाद काम करने लगे। वह ऑनलाइन कॉस्मेटिक्स की लाइवस्ट्रीम बिक्री से जुड़े हैं और इसी क्षेत्र में सफलता की उम्मीद लेकर मंदिर पहुंचे। उनके मुताबिक, इस काम में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ चुकी है।
लोंगहुआ मंदिर पहुंचने वाले युवाओं के लिए यह जगह केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। कई लोगों के लिए मंदिर जाना मुश्किल समय में उम्मीद और मानसिक सहारे का जरिया भी बन रहा है। वे अपनी नौकरी, भविष्य और आर्थिक स्थिति को लेकर यहां प्रार्थना कर रहे हैं।
शंघाई की यह तस्वीर बताती है कि रोजगार को लेकर दबाव केवल भारत जैसे विकासशील देशों तक सीमित नहीं है। आधुनिक अर्थव्यवस्था और बड़े शहरों में रहने वाले चीन के युवा भी नौकरी की प्रतिस्पर्धा और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। ऐसे में कुछ युवा नौकरी की तलाश और इंटरव्यू के साथ-साथ करियर में सफलता की उम्मीद लेकर मंदिरों तक भी पहुंच रहे हैं।
