ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, CENTCOM ने सभी हमले नाकाम किए

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सैन्य गतिविधियों में विराम दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कूटनीतिक बातचीत को मौका देने के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने के कुछ ही दिनों बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि मिसाइलें मंगलवार शाम 5:45 बजे (ईस्टर्न टाइम) दागी गई थीं। अमेरिकी सेना के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि या नुकसान नहीं हुआ। कमांड का कहना है कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले ही इसी क्षेत्र में हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर लगातार 13 रातों तक सैन्य अभियान चलाया था।

इस बीच, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात भी हुई, जिसमें ईरान से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। व्हाइट हाउस ने बैठक को सकारात्मक और सार्थक बताया।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और किसी समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।

इधर, लाल सागर में भी तनाव बढ़ता नजर आया। यमन के ईरान समर्थित हूती संगठन ने दावा किया कि उसने एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के अनुसार, संबंधित जहाज ने घोषित समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन किया था और चेतावनी के बावजूद अपना रास्ता नहीं बदला, जिसके बाद उसे मार्ग बदलने के लिए मजबूर किया गया।

दूसरी ओर, ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (UKMTO) ने जानकारी दी कि दक्षिणी लाल सागर से गुजर रहे एक टैंकर के कप्तान ने विस्फोट जैसी आवाज सुनने की सूचना दी। एजेंसी के मुताबिक जहाज और चालक दल सुरक्षित हैं तथा किसी प्रकार के नुकसान या प्रदूषण की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इस घटना का हूतियों के दावे से कोई संबंध था या नहीं।

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