ढाका: बांग्लादेश क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम समझौते का हिस्सा बनने पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ढाका को सऊदी अरब की ओर से मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति और दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह मामला बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर की सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ हुई मुलाकात के बाद सामने आया है। दोनों नेताओं की मुलाकात जेद्दा में इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC की बैठक के दौरान हुई। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
हालांकि मंत्रालय ने मक्का पैक्ट में संभावित सदस्यता को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी नहीं दी है, लेकिन मामले से परिचित एक बांग्लादेशी सूत्र के हवाले से रॉयटर्स ने बताया है कि सऊदी अरब ने ढाका को इस सुरक्षा समझौते में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मुख्य आधार सामूहिक सुरक्षा है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश के खिलाफ सैन्य हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
बांग्लादेश के इस समझौते में शामिल होने की संभावित चर्चा ने देश के भीतर भी राजनीतिक बहस को हवा दी है। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की ओर से इसे देश का संप्रभु फैसला बताया गया है। पार्टी का कहना है कि विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े ऐसे फैसले बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लेने के लिए स्वतंत्र है।
वहीं, विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति के संदर्भ में देख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर बांग्लादेश इस समझौते का हिस्सा बनता है तो क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा समीकरण पर इसका असर पड़ सकता है।
कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम बांग्लादेश की मौजूदा विदेश नीति की दिशा को लेकर भी सवाल खड़े कर सकता है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार की नीति को अब तक ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सबसे पहले’ के नजरिए से जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी औपचारिक सामूहिक रक्षा व्यवस्था में शामिल होने का फैसला इस नीति की व्यावहारिक दिशा को लेकर नई बहस पैदा कर सकता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव पर नजर रखती है। यदि ढाका मक्का पैक्ट में शामिल होता है, तो इसे क्षेत्र में पाकिस्तान के सुरक्षा और कूटनीतिक प्रभाव के विस्तार के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
फिलहाल बांग्लादेश की ओर से इस समझौते में शामिल होने को लेकर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ढाका आगे चलकर इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं। आने वाले दिनों में बांग्लादेश सरकार की आधिकारिक स्थिति से ही इस मामले की तस्वीर साफ होगी।
