अमेरिका में हिंदू प्रतीकों पर फिर हमला: ट्रंप के MAGA एक्टिविस्ट ने 90 फुट ऊंची हनुमान मूर्ति को लेकर उगला जहर

रिपब्लिकन नेता कार्लोस टुरसियोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भगवान हनुमान की मूर्ति का एक वीडियो साझा करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत की नई दिल्ली नहीं है, बल्कि टेक्सास का शुगर लैंड शहर है।

टेक्सास/वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं द्वारा हिंदू प्रतीकों को निशाना बनाने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। टेक्सास के शुगर लैंड शहर में स्थापित भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा पर अब रिपब्लिकन नेता और ‘MAGA’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) मिशन के एक्टिविस्ट कार्लोस टुरसियोस ने विवादित टिप्पणी की है। टुरसियोस ने इस प्रतिमा को ‘तीसरी दुनिया के एलियंस’ का कब्जा करार देते हुए इसे रोकने की मांग की है, जिसके बाद अमेरिकी हिंदू समुदाय और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भारी आक्रोश है।

अतिक्रमण और एलियन जैसे शब्दों का इस्तेमाल

रिपब्लिकन नेता कार्लोस टुरसियोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भगवान हनुमान की मूर्ति का एक वीडियो साझा करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत की नई दिल्ली नहीं है, बल्कि टेक्सास का शुगर लैंड शहर है। टुरसियोस ने आगे लिखा कि तीसरी दुनिया के एलियंस यानी अवैध रूप से आने वाले विदेशी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति यह क्यों है और इसे तुरंत रोकने की जरूरत है।

आध्यात्मिक केंद्र है ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’

टेक्सास के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस मूर्ति को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ के नाम से जाना जाता है। पंचलोहा अभय हनुमान के नाम से प्रसिद्ध इस प्रतिमा का अनावरण साल 2024 में किया गया था। इसकी परिकल्पना श्री चिन्नाजीयर स्वामीजी ने की थी। 90 फुट ऊंची यह प्रतिमा संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे ऊंचे हिंदू स्मारकों में से एक है और देश की तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति मानी जाती है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह मूर्ति शक्ति, भक्ति का प्रतीक और शांति का एक बड़ा आध्यात्मिक केंद्र है।

बढ़ता विवाद और रिपब्लिकन नेताओं का रुख

यह पहली बार नहीं है जब रिपब्लिकन पार्टी के किसी नेता ने इस मूर्ति पर आपत्ति जताई है। इससे करीब 5 महीने पहले अलेक्जेंडर डंकन ने भी अमेरिका को एक ईसाई देश बताते हुए इस मूर्ति के निर्माण पर सवाल खड़े किए थे। कार्लोस टुरसियोस के ताजा बयान के बाद उन पर ‘जेनोफोबिया’ को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। जेनोफोबिया का अर्थ किसी विदेशी या अपनी संस्कृति से अलग व्यक्ति के प्रति नफरत और डर पालना होता है।

सोशल मीडिया पर लोग टुरसियोस के इस बयान की कड़ी निंदा कर रहे हैं और उन्हें अमेरिकी समाज में प्रवासियों के योगदान की याद दिला रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ ट्रंप प्रशासन भारतीय समुदाय से नजदीकी का दावा करता है, वहीं उनकी पार्टी के नेता लगातार धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान दे रहे हैं।

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