प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहजहांपुर के एक सहायक शिक्षक द्वारा लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण सवाल पर विचार करने का फैसला किया है। कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या किसी व्यक्ति को लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने की अनुमति दी जा सकती है।
जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने लिंग परिवर्तन के बाद पहचान से जुड़े इस संवेदनशील मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एचआर मिश्रा और अधिवक्ता वीआर तिवारी से इस प्रश्न पर कोर्ट की सहायता करने का अनुरोध किया है।
दरअसल, यह आदेश शाहजहांपुर निवासी एक सहायक शिक्षक की रिट याचिका पर पारित किया गया है। याची शिक्षक ने अपनी लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम बदलने की मांग इलाहाबाद हाईकोर्ट से करते हुए यह याचिका दाखिल की है। याची ने 2020 में अपना लिंग परिवर्तन कराने का प्रयास शुरू किया था और तीन साल बाद, 2023 में, यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई।
लिंग परिवर्तन के बाद, याची शिक्षक ने ज़िला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर लिंग परिवर्तन प्रमाणपत्र और पहचान पत्र भी प्राप्त कर लिया। इसके बाद उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने के लिए कोर्ट का रुख किया है।
कोर्ट ने अधिवक्ताओं से इस मामले में 19 अगस्त 2025 को कर्नाटक और मणिपुर हाईकोर्ट द्वारा पारित दो आदेशों का अवलोकन (review) करने के लिए भी कहा है। इस याचिका में राज्य सरकार, माध्यमिक शिक्षा के निदेशक और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले में अब अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
