राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई नियमावली जारी की है। अब तक आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल संक्षिप्त अंश का ही प्रयोग होता था, लेकिन नए आदेश के अनुसार अब इसके छह अंतरा (छंद) वाले संस्करण का वादन या गायन अनिवार्य होगा। यह नियम ध्वजारोहण, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन, उनके भाषणों तथा राष्ट्र के नाम संबोधन जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
150 साल का गौरवशाली सफर
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ को इस वर्ष 150 साल पूरे हो रहे हैं। इसकी रचना 7 नवंबर 1875 को की गई थी और बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया। संस्कृत मिश्रित बंगाली भाषा में लिखा गया यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बना। ‘मैं तुम्हें नमन करता हूँ माँ’ के अर्थ वाला यह गीत आंदोलनकारियों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत रहा है।
नया नियम और प्रोटोकॉल
सरकारी आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय गीत के प्रति गरिमा बनाए रखने के लिए समय सीमा और छंदों की संख्या तय की गई है:
- निर्धारित समय: 3 मिनट और 10 सेकंड।
- अनिवार्यता: राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों के औपचारिक कार्यक्रमों, भाषणों से पहले और समापन पर इसका गायन अनिवार्य होगा।
- छह छंद: गीत में मातृभूमि को सुजलां-सुफलां, शक्ति स्वरूपा, विद्या और धर्म के रूप में वर्णित करने वाले सभी छह छंदों को इस नए संस्करण में शामिल किया गया है।
छंद 1
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।
शस्यशामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।
सुखदां वरदां मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 2
वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।
रिपुदलवारिणीं मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 3
वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म।
तुमि हृदि, तुमि मर्म।
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति।
हृदये तुमि मा भक्ति।
तोमारई प्रतिमा गडि।
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 4
वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।
कमला कमलदलविहारिणी।
वाणी विद्यादायिनी।
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलां अमलां अतुलां।
सुजलां सुफलां मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 5
वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।
धरणीं भरणीं मातरम्।
शत्रु-दल-वारिणीं।
मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 6
वन्दे मातरम्।
त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।
त्वं हि शक्ति मातरम्।
वन्दे मातरम्।।

गीत का महत्व और संदेश
यह गीत भारत को एक ऐसी ‘माँ’ के रूप में चित्रित करता है जो हरियाली, जल और प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह केवल एक साहित्यिक गीत नहीं रह गया था, बल्कि सैनिकों और छात्रों के लिए संघर्ष का जयघोष बन गया था। सरकार का मानना है कि पूर्ण संस्करण को आधिकारिक मान्यता देने से नई पीढ़ी इस गीत की गहराई और इसके साहित्यिक सौंदर्य से बेहतर ढंग से जुड़ पाएगी।
अब सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि वे आधिकारिक आयोजनों में इसी निर्धारित अवधि और संस्करण का पालन करें ताकि राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में देश भर में एकरूपता बनी रहे।
