Bengal Politics 2026: कोलकाता में पुलिस से भिड़े TMC कार्यकर्ता; बिना अनुमति मार्च पर अड़ीं ममता बनर्जी, नए विधायक प्रदर्शन से गायब

कोलकाता में ममता बनर्जी के विरोध मार्च और टीएमसी के भीतर कथित असंतोष को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बागी नेताओं के दावों, अभिषेक बनर्जी विवाद और बीजेपी पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

ममता बनर्जी का कोलकाता में विरोध मार्च
ममता बनर्जी का कोलकाता में विरोध मार्च

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज मंगलवार, 2 जून को तब एक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद, पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने शहर के मध्य भाग में एस्प्लेनेड के पास राशमोनी एवेन्यू में एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व किया। अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद ममता बनर्जी बेहद गुस्से में हैं। राज्य की सत्ता जाते ही टीएमसी विधायक दल में टूट का बड़ा खतरा भी मंडराने लगा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि विधानसभा में जल्द ही दो टीएमसी यानी ‘तृणमूल कांग्रेस’ और ‘असली तृणमूल’ नजर आ सकती है।

कोलकाता के एमएलए हॉस्टल में बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मिलने वाले विधायकों की एक लंबी लिस्ट सामने आई है, जिनमें मालदा-मुर्शिदाबाद के विधायक शामिल थे। इस बगावत का असर आज के मार्च में भी साफ देखने को मिला, क्योंकि ममता बनर्जी की मीटिंग से पहले ही 80 में से 60 विधायक गायब रहे थे और आज इस विरोध मार्च में भी टीएमसी के टिकट पर हाल ही में विधानसभा सीटें जीतने वाले ज़्यादातर नए चेहरे नदारद दिखे। इस तरह भाजपा से सियासी मोर्चे पर जंग लड़ रहीं ममता बनर्जी को अपने ही विधायकों से नाउम्मीदी हाथ लगी है।

ममता बनर्जी जब आज अपने समर्थकों के साथ एस्प्लेनेड के Y-चैनल पर धरने वाली जगह पर पहुंचीं, तो कोलकाता पुलिस ने उन्हें धरना देने से मना कर दिया और टीएमसी की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें उन्होंने पास की रानी राशमोनी रोड पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी।

इसके बाद वहां तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। इस दौरान विरोध स्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई और जब ममता बनर्जी टीएमसी समर्थकों को संबोधित कर रही थीं, तब बीच-बीच में लोग “ममता बनर्जी जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे। इस मौके पर उनके भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी, टीएमसी के बड़े नेता मदन मित्रा, सांसद कल्याण बनर्जी, फिरहाद हकीम, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन भी नज़र आए।

यह धरना हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और नेताओं पर कथित हमलों, शनिवार को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में आयोजित किया गया है। धरना स्थल पर किसी भी तरह की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मेगाफोन से भीड़ को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के लिए 294 में से 177 सीटों पर मतगणना में भारी धांधली की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनों में भाग न लेने की धमकी दे रही है, लेकिन वह अपना यह विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मंच बनाने या माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई, इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि यह धरना तय कार्यक्रम के अनुसार शाम तक जारी रहेगा। दूसरी तरफ, राजनीतिक हालात को देखते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने अपनी पार्टी में टीएमसी नेताओं की एंट्री बंद करने की घोषणा की है।

इस बिखराव की शुरुआत बंगाल में बीजेपी की शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के साथ ही हो गई थी। हारने वाले उम्मीदवारों और कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के चुनावी डायलॉग और कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया था।

19 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में भी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी को लेकर कड़े सवाल किए थे। उस समय ऋतब्रत बनर्जी ने फाल्टा में जहांगीर खान और अभिषेक के रिश्ते पर टिप्पणी की थी, लेकिन ममता बनर्जी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद जाली दस्तखत का बवाल हुआ, जहां ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर दावा किया कि टीएमसी की ओर से भेजे गए लेटर में उनके दस्तखत जाली थे। इसके बाद ममता बनर्जी ने दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया, जिससे विधायकों का बागी गुट और सक्रिय हो गया।

अब टीएमसी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि टीएमसी के लगभग 50 बागी विधायक विधानसभा स्पीकर के पास जाकर तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे। वे विधायक दल में दो-तिहाई बहुमत होने के कारण खुद को ‘असली तृणमूल’ होने का दावा पेश करेंगे और चुनाव चिन्ह पर भी अपना हक मांगेंगे। साथ ही वे विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बंदोपाध्याय के नाम का दावा करेंगे।

रिजू दत्ता का कहना है कि बंगाल में अभी शिवसेना का महाराष्ट्र मॉडल लागू है और चुनाव में हार की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी दोनों को लेनी होगी क्योंकि जिन लोगों को अभिषेक हाथ पकड़कर लाए थे, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंपा है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने वाम संगठन एसएफआई से छात्र राजनीति शुरू की थी, 2020 में टीएमसी से जुड़े, ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बने, दो बार राज्यसभा सांसद रहे और अब 2026 के विधानसभा चुनाव में उलूबेरिया पूरबा से जीतकर टीएमसी में बगावत का झंडा बुलंद किए हुए हैं।

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